206 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
सकता। इसीलिए यदि हर अल्पसंख्यक समुदाय को सही अनुपात में प्रतिनिधित्व दिया जा रहा है, तो फिर दलित वर्ग को वह क्यों न मिले? प्रांतीय विधानसभाओं में साइमन कमीशन ने दलित वर्ग के लिए किस अनुपात का सुझाव दिया है? उनके अनुसार, इस तरह की आरक्षित जगहों की संख्या उस चुनाव क्षेत्र में अन्य वर्ग की जनसंख्या के अनुपात में दलित वर्ग की जनसंख्या के तीन चौथाई जितनी हो। भारत के अन्य अल्पसंख्यक समुदायों को साइमन कमीशन के द्वारा दिया गया आरक्षण भी देखिए। ‘लखनऊ अनुबंध’ में काँग्रेस को परास्त कर मुसलमानों ने जबरदस्ती पाया हुआ अत्यधिक प्रतिनिधित्व उसी तरह कायम रखने की अनुमति दी गई है। भारतीय ईसाई, एंग्लो इंडियन, यूरोपियन आदि को उनकी जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व के साथ-साथ तराजू का तोल बराबर करने के लिए, जिसे पासंग कहा जाता है, वे सरासर ठगी, अतिरिक्त जगहें भी दी गई हैं। क्या यह धोखाधड़ी नहीं है? जो समुदाय कई मुश्किलों से घिरा है, उसके साथ अगर उदार बर्ताव नहीं करना है, तो न करें, लेकिन क्या न्यायपूर्ण बर्ताव का भी वह हकदार नहीं? भारत की केंद्रीय समिति ने भी दलित वर्ग के साथ अन्याय कर केवल उसकी जनसंख्या के अनुपात में उसे प्रतिनिधित्व दिया।
शुरू से ही केंद्रीय संसद के दरवाजे दलित वर्ग के लिए कभी भी खोले नहीं गए। 1921 में जब जनसंख्या के आधार पर उसकी पुनर्रचना की गई तब भी दलित वर्ग को वहां प्रवेश नहीं मिला। सन् 1926 तक 150 सदस्यों वाली विधानसभा में दलित वर्ग को केवल एक जगह देने की मेहेरबानी की गई थी। राज्यसभा के द्व ार तो अब भी उनके लिए बंद हैं। केंद्र की विधानसभा में दलित वर्ग को प्रतिनिधित्व मिले, इसके लिए साइमन कमीशन द्वारा थोड़ी कोशिश की गई थी, लेकिन उसकी योजना केवल विधानसभा तक ही सीमित हैं, राज्यसभा तक तो वे पहुंची ही नहीं। इस छुटपुट सहानुभूति के लिए मैं उनका आभारी हूं, लेकिन उनके इस कृपणतापूर्ण व्यवहार को लेकर मुझे शिकायत भी है। साइमन कमीशन की नियुक्ति होने के दरमियान दलित वर्ग के कई लोगों को विधानसभा में लिया गया। सरकार समेत देश के सभी हिस्सों से सब ने ये हल्ला मचाया है, कि दलित वर्ग की जनसंख्या प्रत्यक्ष जनगणना में सामने आयी जनसंख्या से कहीं अधिक है। जनगणना का न्यूनतम आंकड़ा भी अगर लें तब भी साइमन कमीशन के द्वारा विधानसभा में जगहें देते समय दलित वर्ग की जनसंख्या को प्रति सैंकड़ा बीस मानी गई है। जबकि साइमन कमीशन द्व ारा विधानसभा में जगह देते हुए सैंकड़ा आठ से अधिक जगहें देने से इनकार किया और राज्यसभा में तो एक भी जगह नहीं दी।
मैं यह समझ ही नहीं पा रहा हूं कि अपने हकों और जरूरतों का यह जान बूझकर किया गया अवमूल्यन साइमन कमीशन के द्वारा क्यों किया गया? आपमें से