33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 224

207

हर किसी की यही उम्मीद है कि साइमन कमीशन द्वारा दलित वर्ग के मामले में केवल न्यायपूर्ण ही नहीं वरन् उदार भूमिका रखनी चाहिए। और ऐसा कोई कारण नहीं है, कि जिसके लिए कमीशन द्वारा इस तरह की भूमिका न ली जाए। किसी अल्पसंख्य समुदाय की राजनिष्ठा के बारे में संविधान निर्माण करते हुए उन्हें क्या अधिकार मिल सकते हैं, इस बारे में मुझे आज तो कोई जानकारी नहीं है। लेकिन भारत में जिस प्रकार अधिकार प्रदान करते समय राजनिष्ठा को ध्यान में लिया जा रहा है, तो कहना पडे़गा कि दलित वर्ग की राजनिष्ठा सीमाविहीन है। उन्होंने अंग्रेज राज से प्रेम किया केवल सिद्धांत की तरह और अकृत्रिम। हालांकि दलितों के साथ अधिक उदार बर्ताव किया जाए, यह मांग उन्होंने केवल दलितों की दीन-हीन स्थिति के कारण ही की है। भारत का कोई भी अन्य अल्पसंख्यक समुदाय इतनी दीन-हीन स्थिति में, दमित स्थिति में नहीं है और न इतना अधिक दुर्बल है। उनकी जरूरतें इतनी विस्तृत और इतनी सादी हैं, कि भारत को स्वयंशासित राज्य बनाने की मांग करने के अलावा उनके सामने कोई चारा नहीं है। जिस समुदाय पर इतने अधिक अन्याय किए गए, उसके साथ असल में बहुत उदार बर्ताव किया जाना चाहिए। लेकिन साइमन कमीशन के द्वारा दलितों के साथ न तो उदारतापूर्ण व्यवहार ही किया गया और न ही उनके साथ न्याय ही किया गया है। कोई यह भी पूछ सकता है कि लॉर्ड बर्कनहेड द्वारा साइमन कमीशन की नियुक्ति का प्रस्ताव पार्लियामेंट में प्रस्तुत करते हुए जो भावनाएं व्यक्त की गई थीं, उसका क्या हुआ? तब कहा गया था कि, दलित वर्ग के हम ट्रस्टी, न्यासी हैं और उनकी सुरक्षा का समुचित प्रबंध किए बगैर हम उन्हें किसी और के हाथ में नहीं सौंप सकते। इस प्रकार व्यक्त की गई गंभीर भावनाओं की पूर्तता क्या साइमन कमीशन के द्वारा होती हुई दिखाई देती हैं?

सज्जनों! हमारे साथ अन्य लोग किस तरह का बर्ताव कर रहे हैं, इस बारे में हमें सतर्क रहना चाहिए। मुझे इस बात का डर है कि, अंग्रेज हमारी खस्ता हालत और विपदाओं का जो विज्ञापन कर रहे हैं, वह हमारी बुरी हालत का निवारण करने के लिए नहीं। हो सकता है, इस तरह का तरीका भारत की आजादी को रोकने के लिए उन्हें उपयुक्त लगा हो और इसीलिए वे इसे विज्ञापित कर रहे हों। ऐसी स्थितियों में अंग्रेजों ने हमारे लिए कुछ किया इस बात से विचलित हुए बगैर, और भविष्य में अपना क्या होगा, इस बारे में बेकार की चिंता किए बगैर अपने नेता किसी का भय पाले बिना इस बात के आग्रह पर कायम रहें कि हमारे साथ उदारतापूर्ण न सही लेकिन न्यायपूर्ण बर्ताव तो किया ही जाना चाहिए, यह उनका कर्त्तव्य है। हमारे हालात इस तरह हैं इसलिए इस तरह की मांग करना हमारे लिए जायज है, हमारी दुर्दशा नष्ट करने हेतु न्याय की अपेक्षा रखना हमारा अधिकार है।