33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 225

208 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

Col1 Col2 Col3
f
Col1 Col2
v v©j
v
v ©
Lo j kt
  1. भावी स्वयंशासित भारत में हमें किस सुरक्षा प्रावधानों और उसके समुचित क्रियान्वयन की गारंटी की आवश्यकता है, इस बारे में मैंने काफी जानकारी दी, ऐसा मुझे लगता है। तथापि, इस परिषद के सामने जो विषय हैं, वे यहीं समाप्त नहीं हो जाते हैं। फिलहाल देश में जो चल रहा है, उन राजनीतिक आंदोलनों के बारे में सोचना, यदि यह परिषद टाल गई और उस पर अपनी राय व्यक्त नहीं की गई तो यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि उसका उद्देश्य पूरा हुआ है। दिसंबर 1928 को कलकŸा में हुई इंडियन नेशनल काँग्रेस के अधिवेशन में ब्रिटिश संसद को दिए जाने वाले अंतिम नोटिस के प्रारूप का एक प्रस्ताव पारित किया गया था, यह शायद आपको याद होगा। इस प्रस्ताव में दिसंबर 1929 से पहले भारत को ब्रिटिश साम्राज्य में सार्वभौम राष्ट्र का दर्जा दिया जाए, ये मांगें रखी गईं और साथ में धमकी भी दी गई कि इस मांग को पूरी करने में अगर ब्रिटिश पार्लियामेंट असफल रही तो भारतीय कांँग्रेस अपनी नीतियों में बदलाव लाते हुए पूर्ण स्वराज की मांग की जाएगी। काँग्रेस के इस प्रस्ताव पर वायसराय द्वारा भारतीय राज्य का दर्जा ब्रिटिश साम्राज्य के तहत सार्वभौम हो यह अंग्रेजों का भी उद्देश्य है, इसकी घोषणा की गई। हालांकि इससे काँग्रेस को संतुष्टि नहीं हुई। यह केवल एक उद्देश्य भर हो यह काँग्रेस को पसंद नहीं था, काँग्रेस चाहती थी कि तुरंत इसकी पूर्तता हो। इसीलिए दिसंबर 1929 में जब काँग्रेस का अधिवेशन हुआ, तब काँग्रेस ने अपने ध्येयानुसार भारत के लिए स्वराज की प्राप्ति करने का प्रस्ताव पारित कर एक कदम आगे बढ़ाया। इंडियन नैशनल कांग्रेस के इस प्रस्ताव के बारे में आपकी क्या भूमिका, राय है यह आपको घोषित करना होगा। और फिर हम अपने अपने नजरिए से स्वराज की मांग को खारिज भी कर सकते हैं, क्योंकि वह अव्यावहारिक है और देश के मौजूदा हालात में संकट का कारण भी बन सकता है। जिस देश के लोग एक राष्ट्रीयता की भावना से, एक संविधान से और एक समान भविष्य के साथ जुडे़ होते हैं, वे स्वराज्य से हमें ठगे जा सकते हैं, धोखा उठा सकते हैं। कोई भी इस बात से इनकार नहीं कर सकता कि ऐसी स्थितियों से यह देश कोसों दूर है। साम्राज्य के तहत स्वयंशासन का ध्येय ही बेहतर है, ऐसा मुझे लगता है। क्योंकि, पूर्ण स्वराज का जोखिम टाल कर हम अपने स्वयंशासित राष्ट्र के फायदे प्राप्त कर सकते हैं। इसीलिए हमें पूर्ण स्वतंत्रता के उद्देश्य का समर्थन करने से इनकार करना चाहिए। क्योंकि उसके बारे में काँग्रेस वालों के मन में भी बड़ी आशंकाएं हैं।

  2. लेकिन साम्राज्य के अंतर्गत स्वयंशासन के बारे में आपकी भूमिका क्या होगी? क्योंकि वह भी एक प्रकार का स्वराज होता है, जनता का, जनता के लिए और जनता द्वारा चलाई जाने वाली सरकार होती है। सोच-विचार कर आपको इस सवाल पर सतर्कता से निर्णय लेना चाहिए। अंग्रेजों का इस देश में आना देश