33. अखंड भारत हमारा ध्येय है - अगस्त 1930 नागपुर - Page 229

212 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रवेश कर सकते हैं? अंग्रेजों के आने से पहले आप पुलिस की नौकरी में शामिल नहीं हो सकते थे, क्या अब हो सकते हैं? क्या अंग्रेज सरकार आपको पुलिस की नौकरी में शामिल करती है? अंग्रेजों के आने से पहले आपको सेना में भर्ती होने की इजाजत नहीं थी। क्या अब यह सुविधा आपके लिए उपलब्ध है?

सज्जनों, इनमें से किसी भी सवाल का आप हामी भर कर जवाब नहीं दे सकते। जिन्होंने इस देश पर इतने लंबे अर्से तक राज किया, वे कोई न कोई अच्छी बात हमारे लिए जरूर करते। लेकिन आपकी हालत में नियम से किसी भी तरह का कोई फर्क नहीं आया है। जिस मामले से आपका ताल्लुक है, उन सभी बातों को अंग्रेजों ने बड़ी चालाकी, धूर्तता से यथास्थिति बनाए रखी। एक बार किसी चीनी दर्जी के पास नया कोट बनवाने के लिए दिया गया। नमूने के लिए साथ में एक पुराना कोट भी दिया। उसने बडे़ गर्व के साथ बिल्कुल हुबहू कोट सिल कर दिया थिग्गड़, थेगलियों, कटे-फटे हिस्से समेत! ब्रिटिशों के राज में भी आपके समाज की रचना में जो दोष थे, वर्णव्यवस्था की जो थेगलियां थीं, वे उन्होंने ठीक करने के बजाय जैसी थीं वैसे ही रखीं। और इससे भी आगे जाकर मैं यह कहूंगा कि अंग्रेजों की पूरी शक्ति और सिद्धांतों के बारे में सोच कर लगता है कि, आपके दुःख-दर्द, आपकी पीड़ा, आपकी शिकायतें दूर करने और यहां की समाज रचना में बदलाव करने की क्षमता और कुवत ही अंग्रेज सरकार के पास नहीं है। और जब तक आपके हाथ में सŸा नहीं आती, तब तक आप अपने दुःख का निवारण नहीं कर सकते। जब तक यहां इस देश में अंग्रेजों का राज है वह जब तक जस का तस कायम रहेगा, तब तक आपके हाथ में सŸा की हिस्सेदारी नहीं आएगी, केवल स्वराज्य द्वारा संवैधानिक अधिकार मिलने की स्थिति में ही आपके हाथ सŸा आने की संभावना है, जिसके सहारे आप अपने लोगों को मुक्ति नहीं दिला सकते हैं। मैं जानता हूं कि, अपने देश के बहुसंख्य लोगों के हाथों में स्थित स्वराज यानी लगभग भूतों का बाजार है। दलितों पर हमारे देश के लोगों ने जो अन्याय, अत्याचार और जोर-जबरदस्ती पेशवा के युग में की वह भी मुझे पता है। मुझे डर लगता है कि कहीं आगामी स्वराज में भी हम पर इसी प्रकार अत्याचार न होते रहें। लेकिन सज्जनो, अगर कुछ समय के लिए आप भूतकाल को भूल जाएं और भावी स्वराज के कुछ वर्गों से आम जनता की रक्षा करने वाले संविधान प्रदŸा प्रावधानों के बारे में यदि आप सोचें तो भावी स्वराज में भूतों का बाजार दिखाई देने के बजाय आपको अपने हाथ में सŸा आने की संभावना दिखाई देगी। और अन्य लोगों के साथ आप भी इस देश के सार्वभौम राज्यकŸार् बनेंगे। भूतकाल का भूत आप अपने ऊपर हावी ना होने दें। अपने निर्णय पर आप किसी भी डर का अथवा उपकार का असर होने ना दें। अपने कल्याण के बारे में सोचें, इस तरह मुझे यकीन है कि आप मान्य करोगे कि स्वराज ही आपका सही ध्येय है।