34. देश के स्वराज का मैं समर्थन करता हूं - अक्तूबर 1930 मुंबई - Page 239

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देश के स्वराज का मैं समर्थन करता हूं

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दिनांक 4 अक्तूबर, 1930 को डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर गोलमेज परिषद के लिए इंग्लैंड जाने वाले थे। इसीलिए 2 अक्तूबर, 1930 के दिन शाम 4 बजे मुंबई इलाके के अस्पृश्य माने गए वर्ग की ओर से डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र और थैली अर्पण करने का समारोह डॉ. सोलंकी की अध्यक्षता में दामोदर हॉल के मैदान में संपन्न हुआ। समारोह में करीब छः से सात हजार लोग उपस्थित थे।

अध्यक्ष द्वारा किए गए शुरुआती भाषण के बाद समारोह समिति के महासचिव श्री सीताराम नामदेव शिवतरकर जी ने मानपत्र पढ़ कर सुनाया। उन्होंने कहा कि थैली में अब तक 3700 रुपए इकठ्ठा हुए हैं और उम्मीद है कि कल शाम तक यह रकम 5000 रुपयों तक पहुंच जाएगी। ख्1, मानपत्र इस प्रकार था - मानपत्र

डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर, एम. ए., पी.एच.डी., डी.एस.सी., बार एट-लॉ, एम.एल.सी.

परमप्रिय महाराज, हिंदुस्तान को ग्रेट ब्रिटेन द्वारा स्वराज के अधिकार देने के मामले में बातचीत करने के लिए लंदन में होने वाले गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए सरकार से आमंत्रण पाकर आप जा रहे हैं। ऐसे समय आपके बारे में अपने दलित बंधुओं के मन में जो आदर, प्रेम और विश्वास है उसे व्यक्त करना हमारा पवित्र कर्त्तव्य है, ऐसा हम मानते हैं। आपने जो प्रशंसनीय ज्ञान प्राप्त किया है और जिसके कारण आपको जो अनुभव प्राप्त हुए हैं, उनका उपयोग अपने देश और अपने देशबंधुओं के हित के लिए उपयोग करने का समय आ गया है, जिसके लिए हम आपका हार्दिक अभिनंदन करते हैं।

विद्वतरत्न महोदय, समाजशास्त्र, राजनीतिशास्त्र, अर्थशास्त्र आदि गहन विषयों का दीर्घकाल तक अध्ययन करने के बाद, उनके तहत प्रमेय आदि पर आपने यथायोग्य चिंतन किया है। इस ज्ञान को व्यावहारिक स्तर पर आजमाने के कई मौके आपको अपने देश में और विदेशों में प्राप्त हुए हैं। अपने देश की उन्नति के लिए किन बातों की फिलहाल आवश्यकता है, यह आपने मन में तय किया ही हुआ है। इन बातों से

  1. डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चरित्र : चा. मे. खैरमोडे, खंड 4, पृ. 66