226 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
का कुछ हिस्सा मेरे द्वारा चलाए जा रहे बोर्डिंगों को दिया जाए। इस प्रकार थैली के पैसों का इस्तेमाल किया जाएगा। गोलमेज सम्मेलन के लिए विलायत जाने-आने का खर्च अगर अंग्रेज सरकार दे रही है, तो फिर यह थैली किसलिए? - इस तरह का सवाल आपमें से कुछ लोगों के मन में आना सहज है। लेकिन जिस समय मुझे आपकी मदद की जरूरत थी, तब भी जहां मैंने आपसे मदद लेने की उम्मीद नहीं रखी तो अब मेरे निजी कामों के लिए भी आपकी मदद की जरूरत नहीं होगी। जब जरूरत होगी तब मैं जरूर आपसे मदद मांगूंगा।
मैं गोलमेज परिषद के लिए जाने वाला हूं। इस सम्मेलन से कम से कम अस्पृश्य वर्ग का फायदा जरूर होगा। लेकिन जिन लोगों ने इस सम्मेलन का बहिष्कार किया हुआ है उन लोगों से मैं पूछता हूं कि यदि दो पक्षों में लड़ाई छिड़ जाए तो सुलह की भाषा बोलने में बुराई क्या है? आज सरकार और कांग्रेस के बीच आर-पार की लड़ाई जारी है। काँग्रेस के आंदोलन के कारण सरकार का नुकसान होता हैं इस तरह अगर दोनों पक्ष अगर अड़ जाएं तो किसी न किसी को गोलमेज सम्मेलन के द्वारा सुलह की कोशिश करनी ही होगी। सुलह का यह मार्ग गोलमेज सम्मेलन के द्वारा निकल सकता है। इस परिषद से कोई मार्ग नहीं निकलेगा, ऐसा भी कहा जा रहा है। किन्तु मुझे ऐसा नहीं लगता। जिन लोगों को लगता है कि यह परिषद असफल होगी उनसे मैं यह पूछना चाहता हूं कि यह सम्मेलन क्यों असफल रहेगा? आज हिंदू, मुसलमान और अस्पृश्य सब स्वराज चाहते हैं। हाल ही में नागपूर में हुई अखिल भारतीय बहिष्कृत काँग्रेस ने उस तरह का प्रस्ताव पारित किया है। इस बारे में सब की राय एक ही है। मतभेद केवल एक बात के बारे में है और वह है, स्वराज किस तरीके से दें! मतभेद इस बारे में है कि अल्पसंख्यक लोगों की रक्षा हो तो उसके कैसे उपाय हों और उन्हें किस तरीके से सामाजिक, धार्मिक, राजनीतिक समानता मिले। आज ऐसे हिंदू धर्म की आवश्यकता है, जिसमें सभी स्वतंत्र हों। लेकिन मतभेद हैं तो इस बात पर कि स्वराज से मिलने वाली सŸा पूरे समाज में सही ढंग से बंटे या किसी विशिष्ट वर्ग के ही हाथ में रहे। दलित समाज, पिछड़ा वर्ग और बहुसंख्यक समाज अगर मन का बड़प्पन दिखाएं तो आपसी विवाद सुलझाना असंभव नहीं है।
अपने समाज के लिए जो जरूरी है वह तो मांगूंगा ही, लेकिन साथ में इस देश को स्वराज दिया जाए इस तरह का प्रस्ताव रखा गया, तो मैं उसका समर्थन करूंगा। इस देश की हर तरह से उन्नति हो और यह देश श्रेष्ठता के पद पर पहुंचे यह काँग्रेस की ही तरह हमारी भी मनोकामना है। आखिर, गोलमेज सम्मेलन पूरा होने के बाद मैं लोक-जागृति का काम करना चाहता हूं। यह बेहद महत्वपूर्ण काम है। काँग्रेस का आंदोलन अमेरिका, जर्मनी आदि सभी देशों में होता है। उसी तरह