35. जब तक इस देश में अंग्रेज सरकार है, हमारे हाथ में सत्ता आना संभव नहीं - नवंबर 1930 लंदन - Page 246

229

विघ्नों से घिरे हैं कि परिणामतः मुझे यकीन है कि राजनीतिक समस्या को हल करने के सही रास्ते तक जाएगा ही। मुझे उम्मीद है कि इस प्रश्न को जितनी जल्दी हो सके हल करने की जिम्मेदारी यह परिषद स्वीकारेगी।

जहां तक संभव हो सके, मैं इस समस्या को संक्षेप में प्रस्तुत करने की कोशिश करूंगा। मैं बस यह बताना चाहता हूं कि जितनी जल्दी हो सके भारत में प्रचलित नौकरशाही को रद्द कर लोगों की, लोगों के द्वारा और लोगों के लिए चलाई जाने वाली, सरकार स्थापन की जाए। मुझे यकीन है कि दलित वर्ग के दृष्टिकोण से मेरे इस विधान के बारे में कुछ लोगों को अचरज महसूस होगा। क्योंकि दलित वर्ग को ब्रिटिश शासकों के साथ जोड़ने वाला धागा बिल्कुल अलग किस्म का है। धर्मांध हिंदुओं ने पीढ़ी-दर-पीढ़ी दलितों पर जो अन्याय किए, उनका जो दमन किया उनसे आंशिक छुटकारा दिलाने वाले मुक्तिदाता के रूप में उन्होंने अंग्रेजों का स्वागत ही किया। हिंदू, मुसलमान और सिक्खों के खिलाफ होकर अंग्रेजों के पक्ष में लड़ कर उन्होंने भारत का साम्राज्य उन्हें प्राप्त करवा दिया। इसके बदले में दलितों के विश्वस्त के रूप में भूमिका निभाने का वचन भी अंग्रेजों ने दिया था। इस तरह दोनों के बीच जो घनिष्ठ संबंध था, उसकी पृष्ठभूमि पर दलितों के मन में जो यह परिवर्तन आया वह एक लक्षणीय बदलाव की तरफ संकेत कर रहा है। इस मतपरिवर्तन के कारणों को ढूंढना मुश्किल नहीं है। केवल बहुमत के हाथों अपना भविष्य सौंप देना है, इस इच्छा के कारण हमने यह निर्णय नहीं लिया है। आप जानते ही हैं कि भारत का बहुमत और मैं जिस अल्पमत का प्रतिनिधि हूं, उनमें कभी बेहतर रिश्ते नहीं रहे। हमने अपना निर्णय अलग से लिया है। हम जिन हालात में फंसे हैं, उनके संदर्भ में वर्तमान सरकार को हमने जांचा-परखा है और अच्छी सरकार के लिए जो आवश्यक होते हैं, वे मूलतत्व इस सरकार में नहीं हैं, यह हमने पाया है। आज के हमारे हालात और ब्रिटिषराज से पहले का भारतीय समाज की आपस में तुलना करें तो पता चलता है कि पुराने समाज में हमारे हिस्से जो दुर्भाग्यपूर्ण हालात आए थे, उनसे निकल कर आगे की ओर बढ़ने के बजाय हम बस कालक्रमण कर रहे हैं। ब्रिटिशों के आने से पहले अस्पृश्यता के कारण हम अत्यंत घिनौने हालात में दिन बिता रहे थे. ये हालात दूर करने के लिए अंग्रेज सरकार ने क्या कुछ किया है? अंग्रेजों के आने से पहले हमें गांव के कुएं पर पानी भरने के लिए पाबंदी थी। कुओं पर पानी भरने का अधिकार क्या अंग्रेज शासन ने हमें दिलाया? अंग्रेजों के आने से पहले हम मंदिरों में प्रवेश नहीं कर सकते थे, क्या अब हम मंदिरों में जा सकते हैं? अंग्रेजों के आने से पहले पुलिस में हमारी भर्ती की इजाज़त नहीं थी। उस पर पाबंदी लगी हुई थी।

यह वाक्य - डॉ अम्बेडकर लाइफ एंड मिशन, घनंजय कीर पृ. 150