35. जब तक इस देश में अंग्रेज सरकार है, हमारे हाथ में सत्ता आना संभव नहीं - नवंबर 1930 लंदन - Page 247

230 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

क्या अब अंग्रेज सरकार हमें पुलिस में प्रवेश दिला रही है? अंग्रेजों के आने से पहले हमें सेना में प्रवेश नहीं दिया जाता था। क्या ये सरकार हमें सेना में नौकरी करने की इजाज़त देती है? क्या आज यह क्षेत्र हमारे लिए खुला है? इनमें से किसी भी सवाल का हम हां में जवाब नहीं दे सकते हैं। इतने लंबे अर्से तक जिन्होंने राजसŸा चलाई, वह केवल इसलिए कि वे अंग्रेज थे। मैं बड़ी खुशी से यह बात मानता हूं कि उन्होंने हमारे लिए कुछ अच्छे काम भी किए हैं। लेकिन हमारे हालात में उन्होंने कोई बुनियादी बदलाव नहीं किए। समाज की जो व्यवस्था थी, उसी को उन्होंने सुरक्षा प्रदान की। एक चीनी दर्जी को नमूने के तौर पर एक पुराना कोट दिया गया था जिसमें कुछ सिलवटें और छेद पडे़ हुए थे। उसने हुबहू नया कोट बनवाते हुए उस पर ठीक जगह पर सिलवटें और छेद भी बना डाले। ठीक इसी तरह का ब्रिटिश सरकार का इस बारे में कार्य रहा है। ब्रिटिशों ने डे़ सौ सालों तक इस देश पर राज किया, किन्तु हमारे दुःख, खुले ज़ख्मों की तरह वैसे के वैसे ही रहे। उनका कोई इलाज नहीं किया गया।

अंग्रेजों ने हमारे प्रति सहानुभूति व्यक्त नहीं की या वे हमारी स्थितियों के बारे में उदासीन रहे इस कारण हम उन्हें दोष दे रहे हैं ऐसा नहीं है। हमने पाया कि हमारी समस्याओं का तोड़ निकालने में वे पूरी तरह अकार्यक्षम हैं। सिर्फ उदासीनता की समस्या होती, तो हम कह सकते थे कि वह तात्कालिक हो सकती है। उसके कारण फिर हमारी राय में कोई गंभीर बदलाव नहीं आते। लेकिन हालात का गहराई से विश्लेषण करने के बाद ऐसा प्रतीत होता है, कि यह केवल उदासीनता का मामला नहीं है, अपने कर्तव्य को न जान पाने की अकार्यक्षमता के कारण ही ऐसा हुआ है। दलित वर्ग को लगता है कि भारत की अंग्रेज सरकार पर दो गंभीर तरह के बंधन हैं। पहले बंधन का स्वरूप अंतस्थ है और जो लोग अधिकार के पदों पर हैं, उनकी भूमिका, उनके हितसंबंध और उनकी प्रेरणाओं के कारण ये बंधन निर्माण हुए हैं। अंग्रेज सरकार हमारे मसले को सुलझाने में हमारी मदद नहीं कर सकती। इसलिए नहीं बल्कि वे अगर मदद करते हैं, तो उनके कृत्य, उनकी भूमिका, उनके हितसंबंध और उनकी प्रेरणाओं के साथ मेल नहीं खाते इसलिए वे हमारी मदद नहीं कर सकते। अगर इस तरह कोई उपाय किया तो उसके लिए हिंदू समाज की ओर से तीव्र विरोध होगा, इस बात की आशंका भी उन्हें उपाय करने से रोकता है। भारतीय समाज के मर्मस्थान पर वार करने वाले दोषों को खत्म करना जरूरी है, यह बात अंग्रेज सरकार जान गई है। इन्हीं दोषों की वजहों से दलित वर्ग का जीवन हजारों सालों से सड़ता रहा है, यह वे जानते हैं। अंग्रेज सरकार को इस बात का अहसास है कि भारत के जमींदार बहुजन समाज को बेरहमी से निचोड़ते रहे हैं। पूंजीपति भी मजदूर वर्ग को जीने लायक मजदूरी नहीं देते और न काम पर