35. जब तक इस देश में अंग्रेज सरकार है, हमारे हाथ में सत्ता आना संभव नहीं - नवंबर 1930 लंदन - Page 251

234 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

राज्य की व्यवस्था में दलित वर्ग की सुरक्षा और सुखरूपता, सुरक्षितता के हेतु, उन्हें किस तरह के समझौते, सुलह की उम्मीद है वह सही समय पर मैं इस परिषद के आगे रखने वाला हूं। हमें उŸारदायित्व निभाने वाली सरकार की जरूरत है, लेकिन हम यह नहीं चाहते कि नई व्यवस्था में केवल हमारे मालिक बदले, हमारी सुपूर्दगी एक के चंगुल से दूसरे के चंगुल में न हो, इतना ही मैं आज इस अवसर पर कहना चाहता हूं। अगर आप चाहते हैं कि शासक वर्ग जिम्मेदार हो, तो यह जरूरी है विधिमंडल पूरी तरह और सच्चे मायने में प्रातिनिधिक हो! यही आज के इस अवसर मैं कहना चाहता हूं।

अध्यक्ष महोदय, इस तरह साफगोई से मुझे बोलना पड़ रहा है, इस बात का मुझे दुख है। लेकिन इसके अलावा मुझे तो और कोई पर्याय नजर नहीं आ रहा। दलितों का कोई दोस्त नहीं है। आज की सरकार ने अपने अस्तित्व की रक्षा के लिए आज तक कई बहाने बना कर उनसे अपना काम निकलवाया है। हिंदुओं ने भी अपनी जरूरत से उन्हें पास लिया है, तब भी अंतिमतः उन्हें दूर करने के लिए ही लिया और स्पष्टता से अगर कहना हो तो, हिंदू उन्हें अपने अधिकारों से पूरी तरह वंचित रखना चाहते हैं। अपने विशेष अधिकारों में कोई हिस्सेदार न हो इसलिए मुसलमान भी उनका अलग अस्तित्व अस्वीकार करते हैं। यानी सरकार द्वारा दुर्बल बनाया, हिंदुओं के दमन का शिकार और मुसलमानों से अवमानित किया गया वर्ग है यह। मुझे यकीन है कि, और कहीं भी ऐसा वर्ग नहीं होगा, जिसकी इतनी असहाय और असहनीय स्थिति हो गई हो। और इसीलिए मुझे आपका ध्यान इस ओर आकृष्ट करना पड़ा है।

जिस अगले सवाल पर बातचीत होनी है उसके बारे में कहना हो तो, बड़े खेद के साथ मुझे यह कहना है कि, परिषद के सामान्य विषयों के साथ बेकार में ही इस विषय को जोड़ दिया गया है। यह सवाल इतना महत्त्वपूर्ण है कि अलग सत्र में ही अल्पसंख्यकों से जुड़ी इन संमस्याओं के बारे में सोचा जाना चाहिए। छुटपुट जिक्र करने भर से इस सवाल का हल निकलना संभव नहीं है। यह प्रश्न दलितों की दृष्टि से भी अहम होने के कारण महत्त्वपूर्ण है। अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधि के नाते हमें केन्द्र सरकार से यह उम्मीद है कि सरकार अल्पसंख्यकों के हितों को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए और प्रांत के बहुसंख्यकों द्वारा फैलाई जा रही अव्यवस्था पर नियंत्रण रखा जाए। एक भारतीय होने के नाते भारतीय राष्ट्रवाद के संबंध में मुझे निश्चित रूप से आस्था है और इसे बढ़ावा मिले ऐसा मैं चाहता हूं और इसीलिए केंद्रीय प्रशासन पद्धति में मेरा विश्वास है। इस व्यवस्था को विघटित करने या उसमें दरारें पैदा करने का खयाल भी मुझे बेचैन कर जाता है। एक केंद्रीय शासन व्यवस्था में भारतीय राष्ट्र की छवि बनाने की अपार क्षमता है। एक केंद्रीय शासन पद्धति के