35. जब तक इस देश में अंग्रेज सरकार है, हमारे हाथ में सत्ता आना संभव नहीं - नवंबर 1930 लंदन - Page 253

236 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

अगर असफल रहे तो बातचीत में कुछ उम्मीद नहीं बचती। दया के बदले-कभी कभी सŸा और अधिकार पाए जा सकते हैं, लेकिन शक्तिपात और हारी हुई हिंसा को भीख के तौर पर सŸा और अधिकार की मांग नहीं की जा सकती..........

बल के इस्तेमाल के मेरे विरोध की अगली वजह है जी-तोड़ कोशिश कर आप जो कमाएंगे, उसे ही हानि पहुंचाएंगे। आप जो पाते हैं वह उसके मूल रूप में नहीं पाते हैं, आपको जो मिलता है, उसका पहले ही अवमूल्यन हुआ होता है, वह मटियामेल हुआ होता है, वह उजाड़ और उसका सर्वनाश हुआ होता है।

इस यथार्थ को आपने नजरंदाज किया और महान अमेरिका खंड आपके हाथ से निकल गया। आपने उसकी सुध ली तभी बाकी बचे राज्य आपके नियंत्रण में हैं। हममें से जो लोग सुलह की बात को मानते हैं उन्हें मैं एक सलाह देना चाहता हूं यहां के प्रतिनिधियों को शायद ऐसा लगता है कि स्वसŸा वाले राज्यों के स्तर के बारे में होने वाली यह लड़ाई निर्णायक साबित होगी और उसी पर अंतिम निर्णय निर्भर होगा। लेकिन इतने बडे़ सवाल को तार्किक सूत्रों में बांधने की कोशिश करने जैसी कोई बड़ी गलती नहीं होगी। तर्क विज्ञान से मेरा बैर नहीं है, लेकिन यहां के विद्वान अपने पूर्वानुमान ज्ञान से चुनें, यही मेरा कहना है। वरना जिन्हें दूर नहीं किया जा सकता ऐसे संकट आन खडे़ होंगे। मेरा उनके लिए यही संकेत है। डॉ. जॉनसन ने जिस तरह बर्कले के सारे विरोधाभासों को कुचल दिया, उसी तरह तर्क के बल पर हार होने के बाद आप हार मान लेते हो या फिर से तर्क करते हुए उस राय को गलत साबित करने की कोशिश करते हो, यह पूरी तरह आपके स्वभाव पर निर्भर करता है। एक बात शायद कोई ठीक तरह से समझ नहीं पाया है। वह यह कि, देश की फिलहाल मानसिकता और प्रवृŸा ऐसी है, कि बहुसंख्यक लोगों को जो अस्वीकार है, ऐसी कोई भी घटना यहां पर काम की साबित नहीं हो पाती। आप चयन करें, और हम उसको चुपचाप स्वीकार करें, यह व्यवस्था कब की खत्म हो चुकी है। वह कभी भी लौट कर नहीं आने वाली है। इसीलिए संविधान लागू हो, ऐसी अगर आपकी इच्छा हो तो नया संविधान तय करते वक्त नए संविधान को तर्क के आधार के बजाय लोक सम्मति की कसौटी पर कसना चाहिए, यही सही होगा।