37. मैं (बेढंगे) विचित्र देशभक्तों की तरह नहीं हूँ - जनवरी 1931 लंदन - Page 259

242 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

बारे में कोई निर्णय होने तक हम किसी भी घोषणा-पत्र को नहीं मानेंगे। इस बात को यदि नहीं स्वीकार कर लिया गया, तो परिषद की अगली कार्यवाही में मैं और मेरे सहयोगियों का उपस्थित रह पाना संभव नहीं होगा। हमें मजबूरन परिषद से असहयोग भी करना पड़ सकता है।

अध्यक्ष महोदय, आपने पहले हमसे जो वादे किए थे, उनसे मैं कुछ ज्यादा की मांग नहीं कर रहा हूं। ब्रिटिश लोकसभा और जो लोग उनकी ओर से बोलते हैं, वे हमेशा यही कहते आए हैं कि वे दलित वर्ग के विश्वस्त हैं। मुझे यकीन है कि मानवी संबंध सुखमय हों, इसके लिए अक्सर संस्कृतिमान्य तहजीब के तहत की जाने वाली यह सुरक्षित लफ्फाजी भी नहीं है। इसीलिए, मेरी नजर में, यह किसी भी सरकार का यह प्रथम कर्तव्य है, उसे यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि यह विश्वास किसी भी तरह से भंग न हो। माननीय प्रधानमंत्री, मैं आपसे कहना चाहता हूं कि, जिनकी उन्नति, जिनका उत्कर्ष हमारे पूर्ण विध्वंस और अवनति पर ही आधारित है, जिन्होंने कभी सपने में भी हमारे कल्याण की आस्था संजोयी नहीं, अंग्रेज सरकार यदि उनकी दया की भीख पर जीने के लिए ही हमें सौंपना चाहती है, तो हम यही समझेंगे कि ब्रिटिश सरकार ने हमारे साथ भयंकर विश्वासघात किया है।

मेरे इस कथन के कारण भारत के राष्ट्रवादी और देशभक्त मुझे जातिवादी करार देंगे। मैं इस बात से नहीं घबराता। भारत विचित्र देश है, और यहां के राष्ट्रभक्त और देशभक्त भी बेढंगे, विचित्र तरह के लोग हैं। भारतीय राष्ट्रभक्त और देशभक्त ऐसे हैं, जो अपने देशबांधवों के साथ नीच बर्ताव होता हुआ देखते रह जाते हैं। उनकी इंसानियत कभी भी इसके खिलाफ निषेध व्यक्त नहीं करती। यह देशभक्त जानते हैं कि बेवजह यहां के महिलाओं और पुरुषों को मानवी अधिकारों से वंचित रखा गया है, लेकिन उनकी कृतिशील मदद करने के लिए, नागरी संवेदना जागरुक नहीं होती। लोगों के एक बडे़ वर्ग को सार्वजनिक उद्योंगों में आने नहीं दिया गया है, यह वह देशभक्त शर्तिया जानता है, लेकिन न्याय रक्षणार्थ या उन्हें न्यायपूर्ण मौका देने के लिए उसे अपने कर्त्तव्यों की याद नहीं आती। उसे ऐसी सैंकड़ों रूढि़यां याद होती हैं, जो मानव और समाज के लिए हानिकारक साबित हुई हों, लेकिन उसे, उद्वेग दिलाने वाली इन बातों से अंदरूनी तकलीफ कभी नहीं होती। अपने और अपने वर्ग के लिए अधिकार और अधिक अधिकार, यही इस देशभक्त की एकमात्र घोषणा होती है। मुझे खुशी है कि मैं ऐसे देशभक्तों के वर्ग में से एक नहीं हूं। जनतंत्र की रक्षा करने वालों के वर्ग में से मैं हूं, जो किसी भी आकार और पद्धति में होने वाली एकाधिकार पद्धति का विध्वंसक है। ‘एक व्यक्ति एक मूल्य’ यह हमारा उद्देश्य है, और इस साध्य के अनुसार हम राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक जीवन के हर क्षेत्र में कृतिशील होकर, उसके अनुसार आचरण करना चाहते हैं। इन अत्युच्च मूल्यों