38. स्वराज में अस्पृश्य जनता समान अधिकारों के साथ रह सके - मार्च 1931 मुंबई - Page 261

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मुंबई इलाके के अस्पृश्य लोगों ने डॉ. बाबासाहेब का सार्वजनिक स्वागत और सम्मान करना तय किया। इसके लिए रविवार, दिनांक 1 मार्च, 1931 की तारीख तय की गई। स्वागत की इस सार्वजनिक सभा में प्रवेश के लिए दो आने का टिकट रख कर इन टिकटों की बिक्री से होने वाली आय नासिक मंदिर प्रवेश सत्याग्रह के फंड में देने की बात तय हुई। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अपने हितों के बारे में किए अपूर्व कार्य के बारे में सुनने के लिए इस सार्वजनिक सभा में अस्पृश्य समाज के करीब दस हजार लोग उपस्थित थे। परेल मुंबई के दामोदर हॉल के पीछे वाला मैदान लोगों से भर गया था। इस सार्वजनिक सभा का अध्यक्ष स्थान डॉ. पी. जी. सोलंकी ने स्वीकार किया था। सभा के लिए मुंबई इलाके के विभिन्न शहरों से, तहसीलों से आए अस्पृश्यों के प्रतिनिधि उपस्थित थे। समता संघ के उपाध्यक्ष श्री देवराव नाईक के स्वागत भाषण के साथ शाम सात बजे सभा की शुरुआत हुई। उन्होंने डॉक्टर साहब के विलायत में किए गए कार्य का परिचय देते हुए कहा कि, डॉक्टर साहब अपने काम की वजह से केवल अस्पृश्यों के ही नेता नहीं हैं वरन उन्हें आम जनता का और मुसलमान समाज का भी भरपूर समर्थन प्राप्त है। आने वाले समय में वे बहुजन समाज के प्रिय नेता बनेंगे, इसमें कोई शक नहीं। उनके हाथों सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टिकोण से उत्क्रांतिकारक कार्य होंगे, ऐसा ईमानदारी से मुझे लगता है। आप सबकी ओर से जनता के इस सच्चे नेता का स्वागत करने में मुझे बड़ी धन्यता महसूस हो रही है।

डॉ. अम्बेडकर का भाषण सुनने के लिए उत्सुक जनता के भावों को ताड़ कर सभा के अध्यक्ष डॉ. सोलंकी ने अपना स्वागत भाषण संक्षेप में पूरा किया। फिर उन्होंने डॉक्टर साहब से बोलने की विनती की। डॉक्टर साहब ने अपने भाषण में कहा,

”आज करीब पांच महीनों की अवधि के बाद आप सबसे मिलने का अवसर प्राप्त हुआ है, इसकी मुझे बेहद खुशी है। मुझ पर विश्वास करते हुए ही आप सब सहयोग करते हो, इसमें मुझे जितनी धन्यता महसूस होती है, उतना ही जोखिम और जिम्मेदारी का अहसास भी होता है। इंसान के पीछे जो प्रापंचिक स्थितियां पारिवारिक जिम्मेदारियां होती हैं, उनसे मार्ग निकालना अलग बात है, और आप सबके हितों की स्थितियों से मार्ग निकालना बेहद मुश्किल भरा है। इन स्थितियों से निकलने का मार्ग मुझे ही ढूंढ कर निकालना होगा। यहां से गोलमेज सम्मेलन में गए सिक्ख,

* जनताः 9 मार्च, 1931