246 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
चुनावों के बारे में आज की स्थिति संतोषजनक नहीं है। इस बारे में केवल अमीरों और मध्यवर्ग के लोगों को ही मतदान का अधिकार हैं। गरीब और श्रमजीवी लोग अपना प्रतिनिधि नहीं चुन सकते। इस देश में गरीबों की संख्या 90 प्रतिशत है। उन्हें अपने हितसंबंधों के बारे में सरकार का मुंह ताकना पड़ता है। और इसीलिए वे परावलंबी हो जाते हैं। इसीलिए, भाविष्यकालीन आजाद भारत में ऐसी अपमानजनक स्थिति पैदा न हो, इसके लिए सभी वयस्कों को मतदान के अधिकार की मैंने मांग की। इस सवाल पर बहुत माथापच्ची हुई, सिरफुटौवल हुई। हम चार प्रतिनिधियों ने ही इस सवाल पर जोर दिया, लेकिन उसका कोई फायदा नहीं हुआ। यह सवाल जब पूछा गया कि, पृथक या संयुक्त मतदान प्रणाली में से कौन-सी प्रणाली अस्पृश्यों को चाहिए? तब मैंने सुझाव दिया कि सभी वयस्कों को मतदान का अधिकार मिले और पहले दस सालों तक पृथक मतदान पद्धति हो, बाद में संयुक्त मतदान पद्धति हो और सीटों के आरक्षण की व्यवस्था हो। कुछ समय तक पृथक मतदान पद्धति स्वीकार की है।
सरकारी नौकरियों के बारे में कहें तो किसे नियुक्त किया जाए, यह सरकारी अधिकारियों द्वारा नहीं वरन् कमीशन के द्वारा तय किया जाएगा। लेकिन इससे अधिक फायदे की बात यह है कि अनुपाततः कुछ सरकारी नौकरियां अल्पसंख्यक और अस्पृश्य समाज के लिए आरक्षित रखी जाएंगी। इस बारे में जिम्मेदारी के सारे अधिकार केवल गवर्नर के हाथों में ही रहेंगे।
विधान परिषद में बहुसंख्यक, अल्पसंख्यकों के साथ यदि गलत व्यवहार करें तो, या बजट में हमारी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया तो, हम क्या करें? सो, इस समस्या के समाधान के लिए अपील करने का अधिकार हमें दिया गया है। अपनी न्यायपूर्ण मांगों का अनादर हो तो गवर्नर से अपील की जा सकती है और यदि गवर्नर भी ना सुनें तो वाइसराय से अपील करने का अधिकार दिया गया है। इसके अलावा पूरे देश में अस्पृश्यता की समस्या है। इस मामले में एकसूत्रता लाने के लिए केंद्रीय विधिमंडल में अस्पृश्यों की तरफ से एक दीवान नियुक्त कर उसके द्वारा सभी शिकायतें सुनी जाएं। लेकिन इस मामले में संतोषजनक निर्णय नहीं दिया गया है। पुलिस और सेना में अपने लोगों को सभी स्तर की नौकरियां मिलने का प्रावधान रखा गया है। इस मामले में सभी प्रतिनिधियों का इस बात के लिए समर्थन मिल चुका है कि आज के बाद इन दोनों जगहों पर नौकरी पाते समय जाति, धर्म आदि मामलों को लेकर रोक नहीं लगाई जाएगी।
आखिर में इतना ही कहा जा सकता है कि, ऊपर बताई सभी बातों पर सोच-विचार के बाद यही लगता है कि हिंदुस्तान को मिल नेवाले आगामी स्वराज में अल्पसंख्यकों