38. स्वराज में अस्पृश्य जनता समान अधिकारों के साथ रह सके - मार्च 1931 मुंबई - Page 264

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के बारे में शर्तें निश्चित किए बगैर किसी भी तरह का नया संविधान लाना बेकार है। और इस तरह, अगर हम ऐसा स्वराज चाहते हैं जिसमें बहुजन समाज के साथ समता का व्यवहार हो तो हर बालिग को मतदान का अधिकार मिले, इसके लिए कोशिश करना जरूरी है। सभी वयस्कों को मतदान के अधिकार का प्रश्न बहुत महत्वपूर्ण है। और इस बारे में मुझे शिद्दत से यह लगता है कि गरीबों का जीवन जिसमें सुरक्षित नहीं वह स्वराज धोखादायक है।

इसके बाद, नासिक कालाराम मंदिर सत्याग्रह के लिए तन, मन, धन से मदद करने की मैं आप सबसे तहे दिल से विनति करता हूं.। यहां के हालात चिंताजनक हैं ही, इसके बावजूद मेरे पीछे मेरे सहयोगियों ने अखिल भारतीय बहिष्कृत समाज सेवा संघ और डॉ. अम्बेडकर सेवा दल ने जो जिम्मेदारी निभाई है, उसके लिए उन्हें धन्यवाद दिए बगैर रहा नहीं जा रहा।“

डॉ. अम्बेडकर के भाषण के बाद अध्यक्ष डॉ. सोलंकी का भाषण हुआ। विलायत में हुए सम्मेलन में अस्पृश्यों की ओर से उन्होंने कितनी बड़ी जिम्मेदारी निभाई इसकी जानकारी दी। गोलमेज सम्मेलन में गए अन्य प्रतिनिधियों से वे मिले तो उन्होंने उनके बारे में क्या कहा, यह बताया। उनके बाद गुरुवर्य श्री. कृष्णराव केलुस्कर का भाषण हुआ। अपना उज्ज्वल स्वप्न पूरा होने की बात उन्होंने कही। उन्होंने कहा कि, डॉ. अम्बेडकर ने युरोप में अपना तेज प्रकाशित कर वहां के चतुर राजनीतिज्ञों को आश्चर्यचकित किया। उन्होंने जो काम किया वह केवल अस्पृश्य वर्ग के लिए नहीं वरन् पूरे भारतीय समाज के लिए हैं। ईश्वर से उन्होंने डॉ. अम्बेडकर की दीर्घायु की कामना की।

अंत में श्री एस.एन. शिवतरकर जी ने अध्यक्ष, सभा में उपस्थित अतिथि, अस्पृश्य भाई-बहनों का और विभिन्न सेवादलों के प्रति सार्वजनिक रूप से आभार प्रकट किया। और नासिक मंदिर प्रवेश फंड को मुसलमान बंधुओं की तरफ से मि. मनियार ने एक सौ एक रुपयों का चंदा दिए जाने की घोषणा की। बाद में अम्बेडकर सेवादल के सर्वाधिकारी श्री शंकर वडवलकर का स्फूर्तिदायी भाषण हुआ। डॉ. अम्बेडकर को विभिन्न संस्थाओं की ओर से फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण किए जाने के बाद सार्वजनिक सम्मान का यह समारोह समाप्त हुआ।