248 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
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निश्चय के साथ लड़ी सम्मान की लड़ाई में ही अपने आंदोलन की
पुणे जिला बहिष्कृत परिषद का पहला सम्मेलन डॉ बाबासाहेब अम्बेडकर की
अध्यक्षता में जुन्नर तहसील के नारायणगाव में 23 और 24 मई, 1931 को आयोजित
किया गया था। इस परिषद में भाग लेने के लिए पुणे जिले के अलग-अलग इलाकों
से करीब पांच-छः हजार लोगों का समुदाय इकट्ठा हुआ था। मुंबई से श्री सी. ना.
शिवतरकर, श्री लोटेकर, शंकरराव श्रावण भोसले, श्री आडरेकर और गणपत बुवा
आदि अस्पृश्य वर्ग के नेता और मुनशी सेठ, देवीदास, श्री रामचंद्र अनाजी, पा. बुट्टे,
ऑनररी मैजिस्ट्रेट और प्रेसिडंट तहसील लोकल बोर्ड, जुन्नर, श्री. दशरथ पांडुजी
बनकर मेम्बर डिस्ट्रिक्ट लोकल बोर्ड, पुणे, श्री. गजानन रावजी पा. भुजबक, वाईस
प्रेसीडेंट, तालुका लोकल बोर्ड, जुन्नर, श्री भीमाजी गेनूजी, पा. खेबडे, श्री डुंबरे, पाटे,
खैरे, तांबे, शिंदे, मिस्त्री, भुजबल आदि स्थानिक और पुणे से सुभेदार घाडगे, थोरात,
गायकवाड़, चौरे, चंदनशिवे, घोगरे, मधाले, रणपिसे आदि लोग उपस्थित थे। इनके
अलावा मांग और चमार लोगों ने भी हिस्सा लिया था।
स्वागताध्यक्ष श्री देवजी दगडूजी डोलस ने अपने भाषण की शुरुआत में परिषद
के लिए आए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। परिषद जिस गांव में हो रही
थी, उसके ऐतिहासिक महत्व के बारे में उन्होंने बताया। बहिष्कृत समाज का संगठन
मजबूत होने के लिए पहले जातिभेद नष्ट करने की कोशिश तथा अपनी आर्थिक
स्थिति मजबूत करने की कोशिश, इन दो मुद्दों पर ही अपना वक्तव्य केंद्रित कर
उन्होंने अपना भाषण जल्द ही पूरा किया। स्वागताध्यक्ष के भाषण के बाद परिषद के
महासचिव श्री शा. अं. उपशाम ने परिषद के नाम आए शुभ संदेश पढ़ कर सुनाए।
रा. मा. शा. गायकवाड़ और राजमान्य कोंडाजी रामजी मास्तर जी द्वारा सूचना का
समर्थन किए जाने के बाद डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने अध्यक्ष स्थान स्वीकारा। अध्यक्ष
स्थान स्वीकारने के बाद अपने भाषण में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर ने कहा,
आपने आज की परिषद का अध्यक्ष स्थान मुझे दिया लेकिन उसका स्वीकार
करते हुए मुझे थोड़ा संकोच हो रहा है। आजकी इस सभा में अपने परमपूज्य नेता
रा. कोंडाजी रामजी मास्तर उपस्थित हैं, उनके साथ काम करने वाले अन्य लोग भी
यहां उपस्थित हैं। ऐसे नेता भी हैं जिन्होंने मुझसे पहले कई कई सालों से अस्पृश्य
वर्ग में लगातार आंदोलन जारी रखे, ऐसे लोग भी इस जिले में हैं, जो भले आज की
* जनता : 8 जून, 1931