39. निश्चय के साथ लड़ी सम्मान की लड़ाई में ही अपने आंदोलन की सफलता है - मई 1931 नारायणगाव (पुणे) - Page 267

250 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

रखें। सम्मान के साथ और लगातार संघर्ष करने से अपना आंदोलन सफल होने में अधिक समय नहीं लगेगा।“

डॉ. बाबासाहेब के स्फूर्तिदायक भाषण के बाद परिषद में स्थानीय, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रस्ताव पारित किए गए। खास कर लंदन में हुए पहले गोलमेज सम्मेलन में अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर और रा. ब. श्रीनिवासन ने जो कार्य किए उनके लिए उनका अभिनंदन किया गया। विभिन्न प्रस्तावों पर श्री. शिवतरकर, हरिभाऊ रोकडे, गायकवाड, कांबले, दारुले, ओझरकर, फुलपगार, काडोखे, विट्ठल उपशाम, घोगरे, मधाले, रणपिसे, थोरात, शिशुपाल, आमोंडीकर, धोत्रे, ठोसर, चौरे, चंदनशिवे, गायकवाड़, आडरेकर आदि वक्ताओं के भाषण के उपरांत सभा का समापन किया गया।