2. उन्नति में बाधक बनने वालों का निषेध - जून, 1920 नागपुर - Page 27

10 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

को स्वीकार करने वालों को ही हमारा प्रतिनिधि नियुक्त किया जाएगा। इसलिए इस परिषद की पक्की राय है कि डिप्रेस्ड क्लास मिशन ने उन पर निर्भर लोगों के साथ विश्वासघात किया है, इसलिए वह बहिष्कृत वर्ग के विश्वास के योग्य नहीं हैं।

इस प्रस्ताव पर पी. एन. भटकर, द्रविड, कदम वकील के भाषण होने के बाद उनका अनुमोदन करते हुए गवई ने कहा, कि यदि आपको (उग्र उदारवादियों) को नामिनेसन (नामांकन) नहीं चाहिए तो वह हमारे लिए क्यों हो। मिशन अगर सरकार द्वारा प्रतिनिधियों की नियुक्ति की मांग करता तो बेहतर होता। लेकिन उग्र उदारवादियों द्वारा हमारे प्रतिनिधियों की नियुक्ति की मांग क्या हमारे साथ विश्वासघात नहीं है? मिशन ने हमसे पूछे बगैर यह मांग की है जो घातक है। इस कारण डिप्रेस्ड क्लास मिशन से हमारा विश्वास बिल्कुल खत्म हो गया है।

नागपुर यानी इस प्रांत की जनता का सौभाग्य ही कहा जाएगा कि 1920 का भारतीय बहिष्कृत सम्मेलन आयोजित करने का सम्मान यहां के अस्पृश्य कार्यकŸार्ओं को मिला। यदि यह सम्मेलन आयोजित करने के बारे में ऊपर दी हुई पृष्ठभूमि पर गौर करें तो एक बात स्पष्ट है कि इस सम्मेलन को अस्पृश्यों के राजनीतिक जीवन में आगे तरफ बढ़ाए गए कदम के रूप में अभूतपूर्व स्थान हासिल है।

  1. ‘जनता’ का विशेषांक 1933 और ”जनता“ का 13 अप्रैल, 1940 के अंक में प्रकाशित सी. ना. शिवतरकर जी का लेख ”डॉ. अम्बेडकर के सान्निध्य में कुछ संस्मरणीय प्रसंग।“