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हाल ही में प्रकाशित हुआ है। उसके अनुसार वरिष्ठ दर्जे के पुलिस अधिकारी के पद पर पहले अस्पृश्यों की जो नियुक्ति हुई है, वह चमार जाति के व्यक्ति की हुई है। हम चाहते तो उस पद पर महार व्यक्ति की नियुक्ति हो सकती थी, लेकिन हमने ऐसा नहीं किया। अस्पृश्य वर्ग में महार जाति बहुसंख्यक है। चमारादि अल्पसंख्यक जातियों का विश्वास अर्जित करना उसका कर्त्तव्य है, ऐसा मैं समझता हूं। और इसीलिए जो भी सुविधाएं मिलती हैं उनका बड़ा हिस्सा महार समाज के लोगों की नाराजगी सह कर भी मैं चमार आदि अल्पसंख्यक जातियों को मिले, इसका ध्यान रखता हूं। इस बारे में मेरी, ”गोली खाने के लिए महार और रोटी के लिए चमार“ यह नीति है, कह कर मुझ पर टीका-टिप्पणी करने वाले, मेरी आलोचना करने वाले मुझ पर गुस्सा होने वाले कई लोग महार जाति में हैं, यह मैं जानता हूं। मेरे खिलाफ उनकी यही एक बडी शिकायत है! ऐसे हालात में मैं महारों को ही पूरी मलाई खिलाता हूं, चमारादि अल्पसंख्यकों को कुछ मिलने नहीं देता यह आरोप मुझ पर करना बेहद नीचता भरा है और ये आरोप बिल्कुल बेबुनियाद हैं। चमारों में से कुछ जिम्मेवार नेताओं द्वारा इस तरह के आरोप मुझ पर किए जाने से महार समाज के कई लोग जाहिर है कि नाराज हैं। उन्हें आगाह करते हुए मैं उनसे विनति करता हूं कि उन्हें अपना गुस्सा काबू में रखना चाहिए। महार लोग बहुसंख्यक हैं। कोई कुछ कहे, उनका कर्त्तव्य उनके लिए जाहिर है। अन्य अल्पसंख्यक जातियों का जिसमें कल्याण हो, जिसमें उन्हें संतुष्टि हो, ऐसी नीति ही अंत तक हमें अपनानी चाहिए। बिना वजह दोषारोपण करने वाले लोगों को इसी नीति को अपनाकर सही जवाब हम दे सकते हैं। अस्पृश्यों के बीच झगडे़ पैदा हों, महारों के खिलाफ चमारों को खड़ा कर हमारे समग्र कार्य का सर्वनाश करना और फिर हमारी ओर उंगली दिखा कर हंसना ही हमारे हितशत्रुओं का एकमात्र उद्देश्य है। हमें उनकी इस चाल को नाकामयाब करना होगा। बहुसंख्यक होने के नाते यह जिम्मेदारी महारों के कंधों पर ही आती है। उन्हें यह जिम्मेदारी निभानी ही होगी। महार समाज से मैं बारबार यही बात कहता रहा हूं। जैसे को तैसा न्याय आप चमारों के साथ बरत सकते हैं, उनके किए का जवाब भी दे सकते हैं, लेकिन इसमें हमारे आंदोलन का हित नहीं है। उदारता और क्षमाशीलता का ही हमें अनुसरण करना होगा। यही नीति हमारे काम के लिए और हमारे उद्देश्य के लिए आखिर हितकारी और भूषणास्पद होने वाली है।
महार जाति के कुछ लोग भी मुझ पर टीका-टिप्पणी करते हैं। मैं शिक्षा का कार्य नहीं करता, केवल सत्याग्रहादि आंदोलन करता हूं जैसे आरोप मुझ पर लगाए जाते हैं। मेरे इन आलोचकों की नजर में शिक्षा के क्या मायने हैं और वे कितने व्यापक हैं, इसका पता चलता तो उनका समाधान करना आसान हो जाता। सत्याग्रह के और इंसानियत के अधिकार प्राप्त करने के लिए छेडे़ गए आंदोलन में उŸाम शिक्षा हो सकती