| v | Li | `'; |
|---|
| fgy | k, |
|---|
| l | o | kZaxh |
|---|
| d | s |
|---|
| fy | , |
|---|
| Á | ; | Ru | 'k | hy |
|---|
43
अस्पृश्य महिलाएं सर्वांगीण सुधार के लिए प्रयत्नशील रहें
दूसरे गोलमेज सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए अखिल अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर शनिवार दिनांक 15 अगस्त, 1931 को विलायत जाने वाले थे। उसके लिए उन्हें प्रेमपूर्वक विदाई देने के लिए अखिल अस्पृश्य माने गए वर्ग की तरफ से शुक्रवार दिनांक 14 अगस्त, 1931 को मुंबई के सर कावसजी जहांगीर हॉल में डॉ. पी. जी. सोलंकी की अध्यक्षता में समारोह आयोजित किया गया था। शुक्रवार की रात आठ बजे पहले भगिनी वर्ग की तरफ से उन्हें विदाई दी गई। अस्पृश्य मानी गई अनगिनत भगिनीवर्ग के समुदाय से कावसजी हॉल पूरी
खचाखच भरा हुआ था।
इस अवसर पर डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को भगिनीवर्ग तथा पुरुषवर्ग की ओर से विदाई दी गई।
डॉ. अम्बेडकर के स्वास्थ्य में ज्यादा सुधार नहीं आया था। इसके बावजूद इस अवसर पर उपस्थित रह कर उन्होंने भगिनी वर्ग को खास तौर पर उपदेष किया। अपने भाषण में मुख्यतः भगिनी वर्ग को उद्देश्य कर उन्हें अपने स्वावलंबी लड़ाई के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने कहा,
”आज से हमें अपनी उन्नति के लिए अतिरिक्त जोश के साथ काम में जुट जाना होगा। हमारे गले के चारों ओर हिंदुओं ने तथा सरकार ने गुलामी का पाश डाला, हमें शिकंजे से कसा हुआ है, उसे फट से तोड़ कर हमें अपनी आजादी हासिल करनी होगी। हमारी महिलाओं को इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए अपने रहन-सहन में तथा अन्य सामाजिक बातों में बहुत ही सुधार लाने होंगे। सबसे पहले अपने बदन पर के पीतल और निक्कल के अलंकारों का त्याग करना होगा। स्पृश्य समाज की महिलाओं की तरह ही साड़ी पहनने का आपका अंदाज होना चाहिए। साथ ही समाज को हमें यह दिखा देना चाहिए कि अगर चाहें तो हम स्वावलंबन के सहारे क्रांति ला सकते हैं। पुरुषों की सहायता से अपना काम हमेशा बडे़ पैमाने पर चलता रहे, इसलिए उनकी हर तरह से मदद करने के लिए भी आपको तैयार रहना चाहिए।
* जनता : 17 अगस्त, 1931
(यहां दिया जा रहा भाषण डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर द्वारा भगिनीवर्ग को दिया गया था। पुरुषों के लिए उन्होंने जो भाषण दिया उसे अलग से दिया गया है। -संपादक)