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बात के लिए आंदोलन छेडे़ हुए हैं, उन्हें रोकना अगर सरकार के बस की बात नहीं हो तो, और उसके लिए अगर राजनीतिक सŸा का विभाजन करना अनिवार्य हो जाए तो वह सŸा मुसलमान अथवा हिंदू समाज के थोड़े लोगों के या विशिष्ट वर्ग के कब्जे में न चली जाए और उस सŸा का सामान्य लोगों के और पददलित जातियों के बीच बंटवारा हो, इस बारे में सरकार को जागरुक रहना होगा। इसके लिए पहले से कुछ संरक्षणात्मक शर्तों की (सेफगार्डस् की) व्यवस्था होना अति आवश्यक है। इस नजरिए से देखा जाए तो इस प्रश्न को पहले हल किए बगैर तथा आगामी राज्य संविधान में हमारी स्थिति क्या होगी, इसका सही-सही पता चले बगैर उस संविधान को बनाने में हम दिलो-दिमाग से कैसे सहभागी हो सकते हैं?