46. देश की एकता के लिए संगठन जरूरी है - जनवरी 1932 मुंबई - Page 283

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देश की एकता के लिए संगठन जरूरी है

डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर विलायत का अपना काम थोड़े समय के लिए रोक कर लौट रहे हैं, यह खुशखबरी निम्नलिकित पत्रक के द्वारा दी गई थी :-

शुक्रवार, दिनांक 29 जनवरी, 1932 के दिन सुबह 6 बजे (स्टैन्डर्ड टाईम) बेलार्ड पीयर बंदरगाह पर सभी उपस्थित रहें। डॉ. अम्बेडकर के सार्वजनिक स्वागत समारोह में जिन व्यक्तियों को और संस्थाओं को हिस्सा लेना है, वे अपने नाम, ‘डॉ. अम्बेडकर स्वागत समिति’ को दें। गुरुवार शाम छह बजे तक अपने नाम दर्ज कर पासेस लें। संस्था, मंडल या पंचों को नाम दर्ज करने की फीस पांच रुपया प्रति नाम होगी, जबकि व्यक्तियों के लिए यह एक रुपया प्रति व्यक्ति रखी गई है। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के जहाज से उतरकर बेलार्ड पियर स्टेशन के हॉल में पहुंचने के बाद, करीब आठ बजे के आसपास सबकी ओर से स्वागत समारोह आयोजित किया गया है। इस समय सब डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण करें।

दोपहर 3 से 6 बजे तक परेल का डॉ. साहब के लाइब्रेरी हॉल में विभिन्न इलाकों से आए नेताओं में आपसी विचार-विमर्श होगा।

रात 7 से 10 बजे तक गोलमेज सम्मेलन के बारे में डॉ. अम्बेडकर का सार्वजनिक भाषण होगा।

शनिवार, दिनांक 30 जनवरी, को सुबह 11 से दोपहर 1 बजे तक मुंबई के प्रमुख नेताओं के साथ विचार-विमर्श होगा। दोपहर 2.15 की पंजाब मेल से वे गोलमेज सम्मेलन की वर्किंग कमिटी के काम के लिए दिल्ली रवाना होंगे।

स्वागत समिति की सूचना के अनुसार जिन व्यक्तियों ने स्वागत समारोह के पासेस खरीदे होंगे, उनका स्वागत समिति में समावेश होगा।

आपका विनम्र,

सीताराम नामदेव शिवतरकर

सचिव,

डॉ. अम्बेडकर स्वागत समिति, मुंबई

इस प्रकार अस्पृश्य समाज उनके जोरदार स्वागत की तैयारी कर चुका था। संपूर्ण भारत के अस्पृश्य बंधु-बांधवों के आगामी राज्य संविधान के लिए गोलमेज सम्मेलन

* जनता : 23 और 30 जनवरी, 1932