12 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हिमालय नहीं ढहा तो भी मेरे रक्तरंजित सिर को देखकर सात करोड़ अस्पृश्य एक पांव पर उस हिमालय को जमीनदोस्त करने को तैयार हो जाएंगे उसके लिए प्राणों की आहुति देंगे। लेकिन यदि आप लोग आपस में लड़ते-झगड़ते रहे तो मैं ही क्या भगवान भी इस बारे में कुछ नहीं कर पाएगा।
बाबासाहेब के भाषण का लोगों पर असर हुआ। वे लोग तब से शिवतरकर से सहयोग करने लगे।
संदर्भ - ”डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर चरित्र, खंड-2, पृष्ठ-118, 119,
लेखक - चांगदेव भवानराव खैरमोडे़