49. फूट डालने वाली नीति का मैंने अपने पर असर नहीं होने दिया - फरवरी 1932 मद्रास - Page 293

49

M ky u
o ky
d k
i u
v l
g ¨u

मद्रास की अस्पृश्य जनता ने डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को दिनांक 28 फरवरी, 1932 की सार्वजनिक सभा में जो अपूर्व, भरपूर और अद्भुत उत्साह के साथ स्वागत किया उसका मुंबई की अस्पृश्य जनता को शायद अचरज नहीं होगा। क्योंकि डॉ. अम्बेडकर के प्रति अपना विश्वास मुंबई की जनता ने कई बार व्यक्त किया है। इसके बावजूद मद्रास में डॉ. अम्बेडकर का जो भरपूर स्वागत हुआ, वैसा स्वागत मद्रास जैसे शहर में भी कभी-कभार ही देखने को मिलता हैं। इस सभा में अस्पृश्य समाज के ही करीब दस हजार लोग इकट्ठा हुए थे। हजारों लोगों को जगह न मिलने के कारण लौटना पड़ा था। अस्पृश्य समाज के लोगों के अलावा और ब्राह्मणेतर लोगों के अलावा स्पृश्य हिंदू और ईसाई, मुसलमान आदि समुदायों के भी काफी लोग उस सभा में इकट्ठा थे।

शहर के अस्पृश्य समाज में से सभी जातियों के प्रमुख और कायदे कौंसिल के सभी अस्पृश्य प्रतिनिधि वहां हाजिर थे, ही साथ ही ‘जस्टिस’ और मुसलमान पक्ष के प्रमुख नेता भी स्वागत के लिए उपस्थित थे।

‘डिप्रेस्ड क्लासेस सर्विस आर्मी’ (दलित समाज सेवा सेना) संस्था के अध्यक्ष श्री सुंदरराव नायडू ने अध्यक्ष स्थान की शोभा बढ़ाई थी।

‘पददलित लोगों का निर्भय और सच्चा प्रतिनिधि’, इन यथार्थ शब्दों में डॉ. अम्बेडकर की पहचान अध्यक्ष ने वहां उपस्थित लोगों को दी और डॉ. अम्बेडकर ने अस्पृश्य जनता की मानसिकता में कैसी विलक्षण और अपूर्व क्रांति करवाई है, तथा उनके अंदर के खुद के इंसान होने के भाव को, उनके आत्मविश्वास को कैसे जगाया है इस बारे में उन्होंने संक्षेप में जानकारी दी।

अध्यक्ष के भाषण के बाद दलित समाज सेवा सेना, मद्रास प्रांत डिप्रेस्ड क्लासेस फेडरेशन, दी प्रेसिडेन्सी आदि द्रविड़ महाजन सभा, आदिआंध्र महासभा, अरुंधत्येय महासभा, केरल डिप्रेस्ड क्लासेस एसोसिएशन, लेबर युनियन और अन्य कई संस्थाओं की ओर से डॉ. अम्बेडकर को मानपत्र और फूलमालाएं और गुलदस्ते अर्पण किए गए।

उपरिनिर्दिष्ट सभी संस्थाओं के और वहां इकट्ठा जनसमूह के प्रति अपने आभार प्रकट करने के लिए डॉ. अम्बेडकर जब खडे़ हुए तब उनके स्वागत में तालियों की प्रचंड गड़गड़ाहट हुई। उन्होंने अपने भाषण में कहा-

* जनता : 5 मार्च, 1932