49. फूट डालने वाली नीति का मैंने अपने पर असर नहीं होने दिया - फरवरी 1932 मद्रास - Page 295

278 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

समझौते को गलत बता रहे हैं। इसमें अब किसका अपराध है, इसका निर्णय जनता को ही करना होगा, और जनता का निर्णय नेताओं को मानना होगा।

अस्पृश्य समाज जब संगठित होगा और राजसŸा के सूत्र अपने हाथ में लेगा तभी उसकी अस्पृश्यता नष्ट होगी। जहां तक हो सके अपने ही खून पर और अपने सुख-दुःखों का अपने अनुभवों के आधार पर जिन्हें अनुभव होगा, केवल उन्हीं पर भरोसा कीजिए। अन्यों के लंबे-चौडे़ आश्वासनों को और अच्छी-अच्छी बातों में न आइए। राजसŸा पाने के लिए एकता से, स्वावलंबन से और खुद पर, खुद की संघशक्ति पर विश्वास रखते हुए अगर आपने कार्य किया तो आज जो आपको तुच्छ समझते हैं और जैसे चाहे झुलाते रहते हैं, नचाते हैं, वे ही कल आपके पैरों पर लोट लगाएंगे और आपकी सदिच्छा और दोस्ती प्राप्त करने के लिए आप जो चाहेंगे, वह आपके बिना मांगे आपको देंगे।“

स्वामी सहजानंद ने अध्यक्ष और मेहमानों को धन्यवाद दिया और रात आठ बजे सभा का कामकाज पूरा हुआ।