50. किसी के भी बहकावे में आपस में फूट न पड़ने दें - मार्च 1932 सोलापुर - Page 296

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भारतीय गोलमेज परिषद के मतदान कमेटी की स्पेशल गाडी रविवार, दिनांक 6 मार्च, 1932 के दिन पांच बजे सोलापुर में पहुंची। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर इसी गाड़ी से आने वाले थे। लोगों को इस बात की खबर थी, इसलिए जुलूस निकालने के इरादे से ही वे दोपहर के दो बजे से स्टेशन पर आकर खडे़ थे। लोगों की भीड़ की वजह से रेलवे के अधिकारियों ने अस्पृश्यों में से चुनिंदा 50 प्रातिनिधिक लोगों को तथा कुछ स्पृश्य लोगों को ही प्लेटफार्म पर जाने की इजाजत दी थी। उस हिसाब से मे. पापासाहेब, बेंच मैजिस्ट्रेट, धर्माजी ख्ररटमल म्यु. काउंसिलर, मोहनदास बाबरे म्यु. काउंसिलर, रा. जिनाप्पा मेदाले, तोरणे मास्तर, रा. ब. डॉ. मुले, डॉ. वैशंपायन, एम. एल. सी. और श्री प्रधान वकील एम. ए., एल. एल. बी., आदि स्पृश्य और अस्पृश्य लोगों ने डॉ. अम्बेडकर से प्लेटफार्म पर मुलाकात की, उन्हें हार पहनाए, गुलदस्ते दिए। फिर स्टेशन के बाहर इकट्ठा अनगिनत लोगों के आग्रह के कारण वे बाहर आए। कुछ समय तक वहां का वातावरण उनके जयकार की ध्वनि से गूंज उठा।

मे. पापासाहेब बेलपवार जी ने डॉ. अम्बेडकर के विलायत के और हिंदुस्तान के कामों का गौरवपूर्ण उल्लेख किया और कहा कि डॉ. अम्बेडकर की कोशिश के बगैर असली अस्पृश्योद्धार होगा ही नहीं। इस अवसर पर रा. ब. डॉ. मुले का भी गरिमा से परिपूर्ण भाषण हुआ। उसके बाद डॉ. अम्बेडकर ने जवाब देते हुए कहा,

”सोलापुर के महार, मांग, ढोर, चमार, भंगी आदि लोगों को चाहिए कि वे आपस में एकता से रहें। किसी के भी भड़काने-बहकावे में आपस की एकता में फूट न पड़ने दें। खुद को उंचे कहलाने वाले लोग भी हमारे बीच की फूट का फायदा उठाएंगे, यह बात आप कतई न भूलें।“

समयाभाव के कारण डॉ. अम्बेडकर को वहां इकट्ठा लोगों से थोड़े समय बाद ही विदा लेनी पड़ी।

* जनता : 12 मार्च, 1932