51. अस्पृश्य समाज के हाथों में राजनीतिक सूत्र होना जरूरी है - मई 1932 कामठी (नागपुर) - Page 298

281

अफसरों को एडी-चोटी का पसीना एक करना पड़ रहा था। स्टेशन से वे जैसे ही बाहर आए, तो समता दल के 1000 वॉलंटियर्स ने मेहमानों को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। स्टेशन के परिसर में लोगों की भीड़ ऐसे जुटी थी, मानों किसी लोकप्रिय मेले में लोग इकट्ठा हुए हों। दस से पंद्रह हजार का समुदाय बार-बार डॉ. अम्बेडकर की जय का उद्घोष कर रहा था। सभी कामगार डॉ. अम्बेडकर के स्वागत में उपस्थित हुए थे इसके कारण आज नागपुर की सभी मिलें बंद रहीं। एक मिल में कुछ हिंदू और मुसलमान कामगार ही सिर्फ काम पर गए थे। लोगों को डॉ. साहब का दर्शन हो इसके लिए छोटा-सा मंच तैयार किया गया था। गार्ड ऑफ ऑनर की सलामी के बाद डॉ. अम्बेडकर लोगों की जयकार की घोषणा के बीच यहां आकर बैठे। पहले ही आकर उपस्थित हुए डिप्रेस्ड क्लासेस कांग्रेस के अध्यक्ष मुनुस्वामी पिल्लई और रावबहादुर श्रीनिवासन भी वहां आकर बैठे। लोगों ने इन तीनों मेहमानों का फूलमालाएं और गुलदस्ते देकर स्वागत किया। अध्यक्ष और डॉ. अम्बेडकर का जुलूस निकालने की बात सुन कर लोगों में और उत्साह बढ़ गया। कई तरह के फूलों से सजी मोटर में डॉ. अम्बेडकर, मुनुस्वामी पिल्लै और रा. ब. श्रीनिवासन को बिठाया गया था। अन्य मेहमानों के लिए जुलूस में और मोटरें भी थीं। ठीक 9.45 को जुलूस निकाला गया। 10,000-15,000 लोग जुलूस में शामिल थे और डॉ. अम्बेडकर की जय कहते हुए साथ-साथ चल रहे थे। मई महीने की तेज धूप थी, लेकिन लोगों को उसकी परवाह नहीं थी। इंदोरा, गड्डीगुदाम के पास जुलूस आते ही करीब करीब 500 महिलाओं ने डॉ. अम्बेडकर को हार पहनाया। कुछ देर तक जुलूस रोका गया। डॉ. अम्बेडकर ने उन्हें प्रेमपूर्वक विदा किया और जुलूस फिर आगे चला। मंडप के पास जुलूस आते ही श्री साखरे ने बताया कि काँग्रेस का अधिवेशन शाम 5 बजे शुरू होगा। उन्होंने लोगों को अपना खाने-पीने के काम से निवृŸा होने की विनती की। स्टेशन से निकला जुलूस इंदोरा तक आया और वहां पर लोगों को धूप से तकलीफ न हो इसलिए जुलूस विसर्जित किया गया। मेहमानों की गाडि़यां वहीं से आगे कामठी जाने के लिए निकलीं। नागपुर से कामठी गांव बस 10 मील की दूरी पर है। वहां गांव की सीमा तक आते ही फिर से कामठी के लोगों की तरफ से स्वागत करा कर काँफ्रेंस सभा मंडप की तरफ जुलूस निकाला। इस जुलूस में भी छह-सात हजार लोग थे। सामने बैंड बज रहा था और डॉ. अम्बेडकर के नाम का जयकार गूंज रहा था।

पंजाब, संयुक्त प्रांत, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, मुंबई जैसी जगहों से लोग सुबह ही कामठी आ पहुंचे थे।

सभा मंडप बहुत ही बड़ा था। उसमें 15000 तक लोगों के बैठने की सुविधा प्राप्त थी। उस जगह को लताओं और पŸां से सजाया गया था। अध्यक्ष और अन्य