282 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
नेताओं के लिए बढि़या-सा मंच तैयार किया गया था। उस पर कोच, कुर्सियां आदि रखी गई थीं। आए हुए प्रतिनिधियों के लिए बड़े बंगले किराए में लिए गए थे। सभा मंडप में जाने के लिए एक प्रमुख और अन्य तीन दरवाजे रखे गए थे। पास ही प्रतिनिधि का टिकट लेने का दफ्तर खोला गया था। थोड़ी दूरी पर दुकानदारों को जगह दी गई थी। अध्यक्ष को आने में थोड़ी देर हो गई थी, इसलिए ठीक 6 बजे कार्यक्रम की शुरुआत हुई। प्लेटफॉर्म पर हर प्रांत के प्रमुख नेताओं के बैठने का इंतजाम किया गया था। प्रमुख लोगों में बंगाल के श्री मलिक, दुसीया, विश्वास, यूपी के स्वामी अच्छुतानंद, रामसहाय, बलदेव प्रसाद, जयस्वाल, श्यामलाल, बख्तावरलाल, पंजाब के मि. हंसराज, हरीराम, जालंधर के गुरु हंतासिंह, बिहार के श्रीधर रासमल, पुणे के सुभेदार घाडगे, नासिक के पतितपावनदास, मद्रास के श्री कॅनन और रा. ब. श्रीनिवासन, मुंबई के डॉ. अम्बेडकर, शिवतरकर, खोलवडीकर, वनमाली आदि नेता दिखाई दे रहे थे। ठीक छह बजे स्वागत समिति के अध्यक्ष श्री हरदास भाषण करने के लिए खडे़ हुए। स्वागताध्यक्ष और अध्यक्ष के भाषण हुए। बाद में जगह-जगह से प्राप्त 50-60 तार और 50-60 पत्र स्वागत समिति के अध्यक्ष ने पढ़ कर सुनाए। उसमें से केवल एक तार छोड़ कर बाकी सभी तार स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र का समर्थन करने वाले, राजा-मुंजे समझौते का निषेध करने वाले, रावबहादूर श्रीनिवासन और डॉ. अम्बेडकर पर विश्वास व्यक्त करने वाले थे। उस पूरे पत्राचार को या उसके अनुवाद को यहां देना या उनका जिक्र करना स्थलाभाव के कारण असंभव है, हालांकि कुछ का जिक्र करना आवश्यक है। उनमें से मुंबई इलाके के जिला धारवाड़ के मदग से रा. निलाप्पा यल्लाप्पा बेलोडी, म्युनिसिपल स्कूल मेंबर और बसाप्पा नागप्पा घोडके, जनरल मर्चंट ने स्वगताध्यक्ष को निम्नांकित पत्र लिखा था -
”सप्रेम नमस्कार, विनंती विशेष, आपके काँग्रेस का नोटिस जनता पत्र में देखी। कुछ दिक्कतों के कारण हम सभा में उपस्थित नहीं रह सकते। हमारी तरफ से सभी अस्पृश्य लोगों का डॉ. अम्बेडकर की स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र की मांग को पूरा समर्थन है और वे ही हमारे अस्पृश्य संघ के सच्चे नेता हैं। डॉ. मुंजे और रा. ब. राजा के पेक्ट को हम कर्नाटक की जनता का समर्थन नहीं है। रा. ब. राजा और गवई ने स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र का विरोध कर ऐन समय पर हथियार डाल दिए, इसके लिए यहां की जनता के सामने उनका निषेध करने के अलावा कोई चारा नहीं है। हमारा यह पत्र सभा में पढ़ कर सुनाने की मेहरबानी जरूर करें।“
मुंबई के रोहिदास ज्ञानोदय समाज संस्था ने रा. (राजमान्य) वनमाली को अपना प्रतिनिधि बना कर भेजा था, उनके साथ जो संदेश भेजा था उसमें अस्पृश्यों को स्वतंत्र मतदार संघ ही चाहिए, ऐसा कहा गया था।
रा. वनमाली और रा. निलप्पा यल्लप्पा बेलोडी जाति से चमार हैं और रा. बसाप्पा