51. अस्पृश्य समाज के हाथों में राजनीतिक सूत्र होना जरूरी है - मई 1932 कामठी (नागपुर) - Page 300

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नागप्पा घोडके ढोर जाति के हैं। इस बात को ध्यान में रखने पर काँग्रेस की तरफ से जो फूट डालने वाले वाक्य बोले जाते हैं, जैसे कि ”डॉ. अम्बेडकर पर सिर्फ महार जाति को ही भरोसा है और साथ ही स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र सिर्फ महारों को ही चाहिए और चमार, ढोर स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र के विरोधी हैं“ आदि। उनकी बातें कितनी निरर्थक और फालतू हैं यह साफ पता चलता है। जिक्र करने लायक दूसरा खत है असम प्रांत के अस्पृश्यों के बाबू सोनाधरदास सेनापति का। उन्होंने रा. ब. एम. सी. राजा को डॉ. अम्बेडकर के जरिए खत भेजा है।

परिषद के पास कोलकाता से अखिल भारतीय बौद्ध महासभा संस्था के महासचिव का भी एक खत आया था। उसमें परिषद के लिए शुभेच्छाएं देकर सभी अस्पृश्य वर्गों को बौद्ध धर्म की दीक्षा लेनी चाहिए, यह बात सूचित की गई थी।

स्वागत कमेटी के अध्यक्ष द्वारा संदेष तथा पत्रों को पढ़कर सुनाने के पश्चात् विषय नियामक समिति का चुनाव करने के सवाल पर विचार किया गया। रात ठीक 11 बजे विषय नियामक समिति की बैठक की शुरुआत होकर वह काम रात 3 बजे पूरा हुआ। विषय नियामक समिति में जिन-जिन लोगों के सामने जो-जो सवाल थे, उन सभी को डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट जवाब दिए और सबका ठीक तरह से, अच्छे से संतुष्ट किया।

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सुबह 9 बजे काँग्रेस के अधिवेशन की फिर से शुरुआत हुई। पहले दिन के जितना ही लोगों का समुदाय सभा मंडप में उपस्थित था। शुरुआत में अध्यक्ष ने काँग्रेस की सफलता की कामना करने वाले और तार आने का जिक्र किया। फिर काँग्रेस के उस खुले अधिवेशन में निम्नलिखित प्रस्ताव रखे गए - कांग्रेस में रखे गए प्रस्ताव

पहला प्रस्ताव - यह काँग्रेस सार्वभौम बादशाह के प्रति में अपनी राजनिष्ठा व्यक्त करती है।

दूसरा प्रस्ताव - यह काँग्रेस खूनी हिंसात्मक आंदोलन का और सविनय अवज्ञा आंदोलन का निषेध करती है। और सरकार से अनुरोध करती है कि इस आंदोलन पर नियंत्रण रखने की सूचना देती है।

तीसरा प्रस्ताव - बंगाल प्रांत के मिदनापुर जिले के मैजिस्ट्रेट मि. डगलस, आई.