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काँग्रेस की तरफ से इस बात का निषेध किया जाता है और सरकार को
यह खुले आम बताना चाहती है कि इन लोगों द्वारा दिए गए जनसंख्या
के आंकड़ों को सच मानना बेहद जोखिम भरा साबित हो सकता है।
(च) यह काँग्रेस साफ तौर पर यह घोषित करना चाहती है कि पृथक
प्रतिनिधित्व का अधिकार अस्पृश्य वर्ग का अपनी आत्मरक्षा के लिए प्राप्त
प्राकृतिक हक है, जो तात्कालिक नहीं है। इसीलिए लोथियन कमेटी के
सन्मुख साक्ष्य देते समय अस्पृश्यों को स्वतंत्र प्रतिनिधित्व का हक केवल
कुछ समय के लिए ही चाहिए, ऐसा रा. बा. राजा ने जो कहा उसके प्रति
यह काँग्रेस निषेध व्यक्त करती है।
प्रस्ताव रखा - मि. एम. बी. मलिक (बंगाल), मि. एन. सी. धुसिया (बंगाल)
समर्थन किया - मि. रामसहाय (यू. पी.) मि साखरे (सी. पी.), मि. हंसराज (पंजाब), मि. गाडेकर (मुंबई), मि. कानन (मद्रास)
पुष्टि की - महात्मा कालीचरण नंदागवली (सी. पी.), मि. ओगले (वर्हाड), स्वामी अच्छुतानंद (यू.पी.), श्रीमति अंजनीबाई (सेन्ट्रल प्रोविन्स)
मि. खांडेकर (सी. पी.), मि जाटव (दिल्ली) इन दो विरोधी वोटों के अलावा अन्य सभी के वोटों से प्रस्ताव पारित।
छठा प्रस्ताव- राजा-मुंजे समझौता अस्पृश्य वर्ग के राजनीतिक हितों के लिए
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घातक होने के कारण यह काँग्रेस उससे इन्कार करती है और वह इस बात की घोषणा करती है कि इसे स्वीकार करना अस्पृश्य वर्ग के लिए बंधनकारी नहीं है।
प्रस्ताव रखा - पी. बी. मलिक (बंगाल)
समर्थन किया - स्वामी अछुतानंद (सं. प्रांत)
पुष्टि की - बलदेवप्रसाद (सं. प्रांत), बिहाडे (म. प्रांत)
मि. खांडेकर (म. प्रांत) और जाटव (दिल्ली) इन दो विरोधी वोटों के अलावा अन्य सभी वोटों से प्रस्ताव पारित।
सातवां प्रस्ताव - गोलमेज परिषद में अस्पृश्य वर्ग को बहुत ही कम प्रतिनिधि
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दिए गए। उसके लिए यह कॉंग्रेस खेद व्यक्त करती है और सरकार से आग्रहपूर्वक मांग करती है कि गोलमेज सम्मेलन के अगले अधिवेशन में अस्पृश्य वर्ग को भरपूर प्रतिनिधित्व दिया जाए।