51. अस्पृश्य समाज के हाथों में राजनीतिक सूत्र होना जरूरी है - मई 1932 कामठी (नागपुर) - Page 303

286 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

प्रस्ताव रखा - दुलोरलाल (मध्य प्रांत)

समर्थन किया - सुभेदार घाटगे (मुंबई)

पुष्टि की - पाटील (संयुक्त प्रांत)

सभी वोटों से प्रस्ताव पारित।

आठवां प्रस्ताव - डॉ. अम्बेडकर और रा. ब. श्रीनिवासन द्वारा गोलमेज परिषद में किए गए काम के लिए काँग्रेस उन्हें धन्यवाद देती है। और घोषणा करती है कि उन पर अस्पृश्य वर्ग का पूरा विश्वास है।

यह प्रस्ताव अध्यक्ष द्वारा अध्यक्ष पद से सभा पटल पर रखा गया और सभी मतों से पारित हुआ।

नौवां प्रस्ताव - पंजाब के कायदे कौंसिल में अस्पृश्य वर्ग का एक भी प्रतिनिधि दिया नहीं गया है। इस अन्याय के बारे में यह कांग्रेस खेद व्यक्त करती है। अगली बार उनके प्रतिनिधित्व की गुंजाइश रखने की, उस दृष्टि से तैयारी करने की आग्रहपूर्वक विनती करती है।

प्रस्ताव रखा - हंसराज (पंजाब)

समर्थन किया - कानन (मद्रास)

पुष्टि की - गुसावीलाल (मध्य प्रांत)

सभी वोटों से प्रस्ताव पारित।

दसवां प्रस्ताव - मौलिक अधिकारों की जो सूची बनाई जा रही है उसमें आगे गिनाए जा रहे मौलिक अधिकारों का समावेष किया जाए -

(अ) स्थानीय स्वराज संस्थाओं से अस्पृश्यों की जनसंख्या के अनुपात में पृथक

चुनाव संघों के जरिए उनके प्रतिनिधि लिए जाएं।

(ब) केद्रीय सरकार अस्पृश्यों में उच्च दर्जे की शिक्षा के प्रसार के लिए कुछ

रकम कुछ समय के लिए ही सही खर्च करने की जिम्मेदारी ले।

प्रस्ताव रखा - श्यामलाल (मध्य प्रांत)

समर्थन किया - वनमाली (मुंबई)

पुष्टि की - बारसे (संयुक्त प्रांत)

सभी वोटों से प्रस्ताव पारित।