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ग्याहरवां प्रस्ताव- ”ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस फेडरेशन“, इस नाम से सभी अस्पृश्य वर्गों की एक केंद्रीय संगठन स्थापना से करने के लिए इस काँग्रेस की पूरी सहमति है और इस केंद्रीय संस्था का कामकाज सुचारू रूप से चलाने के लिए नियुक्त तात्कालिक समिति को अपनी मंजूरी दे रही है।
बारहवां प्रस्ताव - यह काँग्रेस नासिक के सत्याग्रहियों का अभिनंदन करती है।
11वां और 12वां प्रस्ताव अध्यक्ष ने सभामंच के समक्ष रखे और वे सर्वसहमति से पारित हुए।
काँग्रेस के सामने रखे गए प्रस्तावों पर श्री मलिक, रामसहाय, नंदा-गवली और साखरे के बेहद प्रभावशाली भाषण हुए। सभी प्रस्ताव पारित होने के बाद डॉ. अम्बेडकर इस अवसर पर दो शब्द कहें, इसके लिए लोग आग्रह करने लगे। लोगों के इस आग्रह की खातिर डॉ. अम्बेडकर करीब डेढ़ बजे के आसपास बोलने के लिए खडे़ हुए। उन्होंने अपने भाषण में कहा,
”अस्पृश्य समाज के हाथ में राजनीतिक बागडोर आए, यह बेहद आवश्यक है। इसके लिए सभी लोगों को संगठित होकर अपना ठोस राजनीतिक स्तर प्राप्त करना होगा। जब तक इस देश की राजनीति अस्पृश्यों के नियंत्रण में नहीं आती, तब तक उनकी अस्पृश्यता जाने वाली नहीं है और उनकी अनसुनी भी इसी तरह होती रहेगी।“ उनके बाद रा. ब. श्रीनिवासन् ने भी दो शब्द कहे।
आखिर में कांग्रेस का अगला अधिवेशन बंगाल में आयोजित करने का आमंत्रण श्री मलिक ने दिया। अध्यक्ष का छोटा-सा भाषण हुआ और स्वागत कमेटी द्वारा किए गए बेहतरीन प्रबंध के लिए धन्यवाद दिए जाने के बाद ठीक 2.30 बजे काँग्रेस का अधिवेशन ”डॉं. अम्बेडकर की जय“ की ध्वनि के साथ संपन्न हुआ।