53. भगवान के दर्शन के बिना कोई मरता नहीं - मई 1932 निपाणी (बेलगांव) - Page 306

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भगवान के दर्शन के बिना कोई मरता नहीं

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बेलगांव जिले के चिकोडी तालुके के निपाणी गांव में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को मानपत्र देने और थैली अर्पण करने के समारोह की तैयारियां चल रही थीं। इसी सिलसिले में 23 मई, 1932 के दिन तीन बजे के आसपास कोल्हापुर से निपाणी जाते समय क. कागल, ज. कागल के अस्पृश्य समाज द्वारा महारवाडा की तक्के की इमारत में पान-सुपारी का कार्यक्रम पहले से ही रखा था। डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर मोटर से करीब साढे़ तीन बजे के आसपास जब आ रहे थे, तब उनके स्वागत के लिए कागल जागीर से अस्पृश्य समुदाय के चार-पांच हजार लोग इकट्ठा हुए थे। लोग गांव से चार-पांच फर्लांग की दूरी पर इकट्ठा हुए थे। डॉ. साहब की मोटर आते ही अस्पृष्य समाज ने जोर-जोर से जयजयकार करते हुए तथा बैंड बजाते हुए चले। गाड़ी के पीछे लाठीधारी स्वयंसेवक थे, जो पीछे से जयकार कर रहे थे। मोटर के चारों तरफ भी एक-दूसरे के हाथ पकड़कर लोगों ने चेन बना ली थी। पूरे बंदोबस्त के साथ सब जयकार करते हुए जा रहे थे। इसके अलावा करीब चार-पांच हजार दर्शक इकट्ठा हुए थे। इस तरह के बंदोबस्त के साथ डॉ. बाबासाहेब अांबेडकर का जुलूस निकल पड़ा था। समारोह की जगह पर जुलूस आते ही महिलाओं और पुरुषों ने जोर-जोर से जयघोष किया। मोटर से उतर कर सिंहासन पर विराजमान होते ही मि. भीमराव संताजी कांबले मास्तर ने समयाभाव के कारण गौरव के दो शब्द ही कहे और फिर पुष्पहार अर्पण किया गया।

तय कार्यक्रम के अनुसार तारीख 23 मई, 1932 के दिन कर्नाटक राज्य के बहिष्कृत वर्ग की विभिन्न संस्थाओं की ओर से डॉ. बी. आर. अम्बेडकर को दि. ब. लट्ठे एम. ए, एल.एल.बी. की अध्यक्षता में मानपत्र देने का कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के लिए बेलगांव, धारवाड, कोल्हापुर और सांगली आदि जिलों से करीब 7-8 हजार जनसमुदाय इकट्ठा हुआ था। बैंड के सुस्वर धुन पर कोल्हापुर नगर की सीमा से सभामंडप तक जुलूस आने के बाद मानपत्र प्रदान करने के कार्यक्रम की शुरुआत हुई। समारोह में मंच पर मे. बागडे वकील, पुणे, भाऊराव पाटील - सातारा, दŸाबा पोवार, कोल्हापुर, गणेशाचार्य वकील कोल्हापुर, मलगौडा पाटील बेनाडीकर और अन्य काफी लोग वहां इकट्ठा हुए थे।

शुरुआत में स्वागत के पद्य गाने के बाद मे मारूतीराव राव ने अध्यक्ष की सूचना रखी। उनकी सूचना को बेलगांव के रावसाहब पापाणा ने समर्थन दिया। उसके बाद

जनता : 25 जून, 1932