54. आज हमारा संघर्ष राजनीतिक सत्ता के लिए है - सितंबर 1932 वडाला (मुंबई) - Page 309

292 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

से यदि हम चिपके रहे तो हमें नर्क में सड़ना पडे़गा, और इसीलिए मैं भी इस हिंदू धर्म से एकदम ऊब चुका हूं। इतना ही नहीं, तो मुझे धर्म परिवर्तन करने का मन हो रहा है। लेकिन मैं वैसा यदि कर नहीं रहा हूं तो क्यों? मैं इसी नर्क में क्यों रहना चाहता हूं यह अगर आप पूछेंगे तो उसका जवाब है कि आप लोगों को छोड़ कर जाने का मेरा मन नहीं है। इतना यकीन है कि चाहे कहीं भी जाऊं मैं अपनी हिम्मत से जी सकता हूं। लेकिन मैं आप लोगों के साथ ही क्यों रहना चाहता हूं, इसकी वजह सिर्फ यही है कि आप लोगों को छोड़ कर जाना मुझे रास नहीं आ रहा। साथ ही जो काम मैंने हाथ में लिया है, उसे मैं पूरा करना चाहता हूं। मैं आपसे बस इतना ही कहता हूं कि धर्म के इस चक्कर में आप ना पडें़। पीछे करीब 2000 (दो हजार) सालों तक हिंदुओं ने राज किया उनके बाद अब पिछले 150 सालों से अंग्रेजों ने राज किया। लेकिन इसके बाद जो स्वराज मिलने वाला है, उसमें केवल हिंदू ही राजकाज नहीं चलाएंगे, राज्य को चलाने का काम अब अस्पृश्य और हिंदुओं की सहमति से चलेगा।

हर समाज में कोई न कोई सामर्थ्य (ताकत) होती है। किसी के पास आर्थिक शक्ति होती है। पारसी समाज को ही देखिए। यहां इस सभा में बैठे हुए लोगों से अधिक लोग शायद उस समाज में नहीं होंगे। लेकिन उनके पास आर्थिक सामर्थ्य है। हमारे समाज के लोक उनके यहां मजदूरी करते हैं। ब्राह्मण समाज में अगर आर्थिक ताकत नहीं भी हो, क्योंकि सभी ब्राह्मण अमीर तो नहीं होते, लेकिन उनके हाथ में धार्मिक सŸा है। समाज के हाथ में राजनीतिक सŸा होना बहुत जरूरी है। ऐसी राजनीतिक सŸा आपके लिए पाने के लिए ही मैं गोलमेज सम्मेलन गया था। मेरे उस जाने का फायदा भी आप लोगों को मिला है। मैं वह आपको संक्षेप में बताता हूं।

गोलमेज सम्मेलन जाकर मैंने अस्पृश्यों के लिए दस जगहें पाईं। मेरे खिलाफ जो बोलते हैं वे पूछते हैं कि अम्बेडकर ने गोलमेज सम्मेलन में जाकर क्या हासिल किया? लेकिन अगर वही लोग आज अभी यहां उपस्थित होते तो मैं उन्हें यकीन दिलाता कि जो कुछ मैंने कमाया है, वह किसी और समाज को मिला नहीं है। किसी मुर्गे के आगे अगर हम मोती का चुग्गा डालें तो उसे उन मोतियों की कीमत कैसे पता चलेगी? ज्वार के एक दाने से भी उस मोती का मूल्य उसे कम ही लगेगा।

ये दस जगहें मिलने से हमारे समाज के हाथ में काफी सŸा आई है। संक्षेप में बताना हो तो अब जो स्वराज मिलने वाला है, उसे अब आपके चुने हुए प्रतिनिधि चलाएंगे। यह स्वराज आपकी सहमति से, आपकी सलाह से, आपके मत से ही चलेगी। इसकी पूरी जिम्मेदारी आप पर ही है। अब आपको जो कुछ भी मिला है, वह मेरे हिसाब से काफी है। आपके लिए 10 जगहें आरक्षित हैं। इसके अलावा अहमदाबाद जैसी जगह जहां