54. आज हमारा संघर्ष राजनीतिक सत्ता के लिए है - सितंबर 1932 वडाला (मुंबई) - Page 311

294 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

कुछ दिनों पहले मेरे साथ काम करने वाला सातारा जिले का घोलप नाम का एक लड़का मुझसे कह रहा था कि शिवतरकर मास्तर चमार होने के बावजूद साहब ने उसे अपने पास रखा। इसीलिए उन्होंने मेरे साथ असहयोग किया। लेकिन सातारा के यह महार जिसे शिवतरकर से केवल इसलिए घिन आती है कि वह चमार है वह, खुद भी देवरुखकर जैसे चमार के आश्रय से ही अखबार निकाल रहा है। उसी अखबार को उसने मुझे गालियां देने का माध्यम बनाया है। महार समाज की अंट-शंट ढंग से बदनामी कर देवरुखकर ने हमारे समाज की इज्जत को चौराहे पर टांग दिया है। इन्हीं देवरुखकर के मातहत काम करते हुए इस लंबी नाक वाले महार को कैसे शर्म नहीं महसूस होती? अन्य समाज के लोग हमेशा गालियां देते रहते हैं, उसी तरह हमारे समाज के एक ने गालियां दीं तो मुझे उस बारे में कुछ नहीं लगता। मुझे बस एक आशंका होती है कि आपको मिले हुए अधिकार का सही इस्तेमाल आप कर पाएंगे कि नहीं। मैंने जो इतना बड़ा आंदोलन खड़ा किया है, वह किसी सिद्धांत के सहारे ही छेड़ा है। अपने नेताओं की ऐसी ढुलमुल नीति देख कर मुझे बहुत दुःख होता है। मैं आपसे सिर्फ यही विनती करना चाहता हूं कि आप स्वाभिमानी बनें। अपने सही नेता को चुनें और उसके बताए अनुसार कार्य करें। बेकार में अपने वोट ना बेचें। वरना कोई भी आकर एकाध-दो रुपये देकर वह आपके वोट मताधिकार खरीद लेगा। चुनावों के बारे में भी आपको कई सहूलियतें मिली हुई हैं। इतनी सहूलियतें अन्य किसी समाज को नहीं दी गई हैं। अन्य समाज के लोगों को वोट देने का अधिकार प्राप्त होने के लिए कम से कम मराठी चौथी कक्षा तक की शिक्षा होना अनिवार्य है। लेकिन आपकी ऐसी स्थिति नहीं है, आपको बस अपने हस्ताक्षर करना आना चाहिए। आपको बस ‘रामापांड्या’ या जो भी आपका नाम हो उस नाम से अपने हस्ताक्षर करना आया, तो फिर आपको वोट देने का अधिकार प्राप्त हुआ। यह सहूलियत अन्य किसी समाज को नहीं मिली है। केवल अस्पृश्य लोगों को ही दी गई है। इसीलिए कहता हूं आप में से हर किसी को रात के स्कूल में जाकर हस्ताक्षर करने जितनी ही सही शिक्षा लेना जरूरी है। ऐसा करने से आपके नाम वोटर रजिस्टर में दर्ज होंगे।“