शनिवार, दिनांक 10 सितंबर, 1932 की रात महार बालवीर संस्था की ओर से
परेल, मुंबई के दामोदर हॉल में सभा का आयोजन किया गया। उस अवसर पर
डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर का भाषण हुआ। उस भाषण का सारांश यहां दे रहे हैं।
दामोदर हॉल लोगों से खचाखच भरा था। कई लोगों को अंदर प्रवेश नहीं मिल
पाया था, इसलिए वे अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे। हमारे संवाददाता को आने
में थोड़ी देर होने के कारण बडी मुश्किल से वह अंदर घुस पाया। तालियों की प्रचंड
गड़गड़ाहट हो रही थी। बाबासाहेब बोलने के लिए जब उठ खडे़ हुए। उस वक्त
वही आवाज (ध्वनि, शोर) बाबासाहेब के मुख से शब्द निकलते ही एकदम बंद हो
गया। निश्चल होकर सभा बाबासाहेब का भाषण सुनने लगी। शुरुआत में मंडल के
बहुविध कार्य के बारे में संतोष व्यक्त करने के बाद उनके शिक्षा विषयक कार्य की
बाबासाहेब ने प्रशंसा की।
मंडल की ओर से प्रस्तुत किए गए हिसाब के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा
कि, ”मंडल की ओर से मेरे स्वागत में पुष्पहार की खरीदारी पर जो रुपया खर्च
किया गया है, उसे किसी और उपयुक्त काम में लगाया जा सकता था। मंडल की
आर्थिक स्थिति की ओर देखते हुए खर्चे का यह बोझ कुछ अधिक था, ऐसा लगता
है। यह बोझ मंडल पर ना पडे़ और कार्य-विस्तार के लिए उन्हें मदद मिले, इसके
लिए उन्होंने इस अवसर पर मंडल को 25 रुपयों की छोटी-सी मदद की घोषणा
की। उन्होंने आगे कहा कि,
”आज अस्पृश्य समाज के सामने बेहद जरूरी अगर कोई काम है, तो वह है शिक्षा
के प्रसार का काम। समाज के हर व्यक्ति को तथा हर संस्था को शिक्षा के क्षेत्र में
अपनी युवा पीढ़ी के कदम आगे कैसे बढ़ेंगे, इस ओर ध्यान देना चाहिए। तथा उसी
दिशा में अपने काम की ओर नजर रखनी चाहिए। हमने खुद भी यही काम शुरू
किया है। और उस हिसाब से काम जारी रखा है। इसका प्रमाण है फिलहाल चल
रहे तीन बोर्डिंग। महाराष्ट्र के बच्चों के लिए ठाणे का बोर्डिंग, कर्नाटक के शिशुओं के
लिए धारवाड़ का बोर्डिंग और गुजरात के बच्चों के लिए अहमदाबाद का बोर्डिंग। इन
तीनों जगहों पर आज की तारीख में करीब सौ बच्चों की व्यवस्था की गई है।“
* जनता : 17 सितंबर,, 1932