55. अस्पृश्य समाज के लिए शिक्षा के प्रसार की बेहद जरूरत है - सितंबर 1932 परेल(मुंबई) - Page 314

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कि वे जब अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त करने के लिए मुंबई आए थे, तब के हालात का उन्होंने वर्णन किया। मुंबई की मलिन बस्ती में अपना 8 फूट चौडाई और दस फूट लंबाई वाला कमरा, उसमें रहने वाले आठ-दस जिंदा लोग, कमरे के एक तरफ मोरी, उसके पास ही चूल्हा, कोने में और सिर पर के माले पर रखी लकडि़यां, हर तरफ धुआं ही धुआं और उसी में इतने लोगों का अपने-अपने काम निपटाना, छात्रों की संगत का अभाव, ऐसे कठिन हालात में पाठ्यक्रम पूरा करके अलग-अलग परीक्षाएं कैसे देनी पड़ीं, इसका बाबासाहेब ने मनोहारी वर्णन किया। आज के छात्रों के लिए अलग-अलग तरह की छात्रवृŸायां, रहने के लिए बोर्डिंग और पठन-पाठन करने वाले छात्रों का सहवास मिलने के कारण उनके लिए पढ़ाई बेहद आसान हो गई है। इसीलिए कहता हूं कि इस मौके का फायदा उठा कर अपना और अपने समाज का कल्याण करना हर युवा का कर्तव्य है। आखिर में उन्होंने छात्रों को उपदेश दिया कि, छात्रावस्था में अपने सामने केवल विद्याध्ययन का ही उद्देश्य रखना चाहिए। छात्रावस्था फिर से प्राप्त नहीं होने वाली। इस अवधि में घनघोर कोशिशें करके ज्ञान प्राप्त करें। समाजसेवा के लिए आगे चल कर जीवन में बहुत समय मिलेगा। छात्रावस्था में ही व्याख्यान देकर समाज का जो भी हित करने की कोशिश की जाती हो, वह पूर्ण ज्ञानप्राप्ति के बाद समाज की सेवा करने की तुलना में कमतर, निकृष्ट होती है। इन बातों को ध्यान में रखते हुए फिलहाल शिक्षा की प्राप्ति ही अपने जीवन का उद्देश्य रखने का उपदेश उन्होंने बच्चों को दिया। बाद में उन्होंने मंडल की तरफ से उन्हें जो मौका दिया गया, उसके लिए उन्होंने मंडल के प्रति आभार व्यक्त किया। मंडल के काम में सुयष की कामना करते हुए उन्होंने अपना भाषण समाप्त किया।

उनके बाद रा. डी. वी. प्रधान का भाषण हुआ। मंडल के कार्यकर्ताओं के उत्साह के बारे में आनंद व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि किस तरह अखबार लोकशिक्षा का काम करते हैं। अस्पृश्य जनता के लिए निकलने वाला ‘जनता’ पत्र अस्पृश्य समाज का मुखपत्र है, और इसीलिए सभी अस्पृश्य लोगों को मनोभाव के साथ उसका पठन करना चाहिए, यह कह कर उन्होंने बताया कि जनता पत्र का प्रसार यानी लोकशिक्षा का प्रसार है। इसके लिए ‘जनता’ के खरीददारों की संख्या बढ़ना कितना आवश्यक है, यह बताया। फिर मंडल के सचिव ने बाबासाहेब का और अन्य आमंत्रित मेहमानों का और वहां एकत्रित अन्य सभी लोगों के प्रति मंडल की ओर से आभार व्यक्त कर बालिकाओं के सुस्वर गायन के साथ डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को पुष्पहार अर्पण किया गया। उसके बाद सभा बर्खास्त हुई।

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