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सभा में हमें प्रतिनिधित्व मिले। अन्य छोटे-बड़े अल्पसंख्यक समुदायों की मांगें कुछ इसी तरह की हैं। मुस्लिम और सिक्खों के संदर्भ में गांधीजी ने इन दोनों मांगों को स्वीकार लिया है। लेकिन अछूतों को विशेष प्रतिनिधित्व देने की बात वे नकार रहे हैं। गांधीजी हमें बता रहे हैं कि मूलभूत अधिकार आपको दिए जाएंगे और उनसे आपको संतोष करना होगा। लेकिन विशेष प्रतिनिधित्व देने के मामले में सिक्ख, मुस्लिम और अछूतों के बीच इस तरह का भेदभाव क्यों बरता जा रहा है यह हमारी समझ से बाहर है।
खुले आम बरते जा रहे इस भेदभाव के बारे में शायद गांधीजी को शर्म महसूस होती हो, इसीलिए अछूतों को वयस्क मताधिकार ( Adult Sufforage ) देकर वे अपनी शर्म पर पर्दा डालना चाहते हों! इस तरह का भेदभाव बरतने की नीति जिस भावना से उपजी है उसकी क्षुद्रता वयस्क मताधिकार देकर कतई कम नहीं होगी। क्योंकि मतदान की इस पद्धति का केवल अछूतों को ही नहीं वरन सबको लाभ मिलेगा। वयस्क मताधिकार जब तक सब पर लागू रहेगा तब तक अछूतों की स्थिति में कोई फर्क नहीं आएगा। आज की ही तरह वे मतदाताओं में भी अल्पसंख्यक ही रहेंगे। साथ ही एक और सवाल भी उठेगा कि अगर अछूतों के हकों की रक्षा केवल वयस्क मतदान पद्धति से ही संभव है तो फिर मुस्लिमों के हितों की रक्षा भी इसी तरीके से क्यों संभव नहीं है? सबके मतानुसार सिक्ख और मुस्लिम दोनों आर्थिक रूप से संपन्न हैं, उनमें संगठितता और नागरिकता के हकों का वे पूरे अर्थों से उपभोग कर रहे हैं। लेकिन अछूतों की स्थिति इसके विपरीत है। अछूत आर्थिक स्तर पर एकदम पिछडे़ हुए हैं। उनमें संगठन बिल्कुल भी नहीं है। साधारण नागरिकों के अधिकार भी उनको नहीं मिल रहे हैं और साथ ही समाज के अन्य वर्ग उनके साथ अत्यंत कठोर बर्ताव करते हैं। न्याय बुद्धि जिसमें जागृत हो ऐसा कोई भी व्यक्ति अलग-अलग जातियों से रखी जा रही मांगों पर समुचित ढंग से सोचेगा तो यही मत व्यक्त करेगा कि इन सभी विभिन्न जातियों से अधिक अछूतों को ही उनके अधिकारों के प्रति सुरक्षा दी जानी चाहिए।
महात्मा गांधी इस बात को नहीं मानते। इसकी वजह यह नहीं है कि वे इस कथन की सच्चाई या न्यायकारकता से असहमत हैं। शायद उन्होंने खुद ही यह धारणा बना ली है कि मांगें मंजूर न होने की स्थिति में अल्पसंख्यक जिस तरह दिल्ली पर हल्ला बोलेंगे, उस तरह अस्पृश्य वर्ग के लोग हल्ला नहीं बोलेंगे। इसी धारणा के कारण अछूतों की मांगों को धता बताने की धृष्टता वे कर रहे हैं। इसके अलावा गांधीजी की राष्ट्रीयता की भावना उच्चवर्ण के हिंदुओं के प्रति उन्हें महसूस हो रहे अपनत्व से जुड़ी है। असल में, मुस्लिम और सिक्ख समुदाय जब राजनीतिक क्षेत्र का अपना हिस्सा लेंगे, उसके बाद बचा हुआ हिस्सा उच्चवर्णीय हिंदुओं के लिए आरक्षित रखने का उनका इरादा है। प्रौढ़ मतदाता पद्धति के लिए अगर वे तैयार हैं तो उसमें खास बात क्या है? राजनीतिक अधिकार पाने का सीधा, सरल