56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 323

306 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

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होअर के नाम गांधीजी का पत्र

दिनांक 11 मार्च, 1932 के दिन येरवडा जेल से गांधीजी ने सैम्युअल होअर को जो पत्र लिखा था, वह निम्नलिखित है -

”प्रिय सर सैम्युअल,

आपको याद होगा कि गोलमेज सम्मेलन में अल्पसंख्यकों के हकों की मांग रखी गई थी। उस समय दिए अपने भाषण के अंत में मैंने कहा था - अस्पृश्य वर्गों को स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र देने की योजना का मैं जीवन के अंतिम क्षणों तक विरोध करूंगा। बोलने या विवाद की रौ में मैंने ये बातें नहीं कही थीं। ये वाक्य मैंने अपने विचारों को व्यक्त करने के लिए बड़ी गंभीरता से कहा था। मैंने जो कहा था उसे पूरा करने के लिए हिंदुस्तान लौटने पर आम तौर पर स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र बनाने के, लेकिन खास तौर पर अस्पृश्यों को उसे देने की योजना के खिलाफ जनमत बनाने का इरादा मैं रखता था। लेकिन शायद ऐसा होना नहीं था। मुझे जो अखबार पढ़ने की इजाजत है उनके आधार से कहा जाए तो लग रहा था कि अस्पृश्यों के लिए स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र बनाने के बारे में अंग्रेज सरकार जल्द ही अपने निर्णय की घोषणा करने वाली थी। पहले मुझे लग रहा था कि उस निर्णय के बाद अगर स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र की स्थापना की जाए तो उसके बाद ही अपनी प्रतिज्ञा का पालन करने के उपायों के बारे में सोचना होगा। लेकिन अब लगता है कि सरकार को अग्रिम सूचना दिए बगैर अपनी प्रतिज्ञा पर अमल करना ठीक नहीं होगा। साथ ही, जो कुछ मैंने कहा जरूरी नहीं कि वह औरों को भी उतना ही महत्वपूर्ण लगे जितना मुझे लगता है।

मैं स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र के विरोध में क्यों हूं?

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अस्पृश्यों के लिए अलग चुनाव क्षेत्र निर्माण करने की योजना के विरोध में जो कारण हैं उनके बारे में विस्तार से चर्चा करने की यहां जरूरत नहीं है। मैं खुद अपने आपको अस्पृश्य मानता हूं। बाकी लोगों में और उनमें फर्क है। संविधान सभा में उनके प्रतिनिधि हों इसके विरोध में मैं नहीं हूं। अन्य वर्गों के मतदान का अधिकार अगर किसी भी हद तक संकुचित किया गया तो भी कोई हर्ज नहीं। लेकिन मतदाता बनने के लिए शिक्षा, संपिŸा आदि मामलों में जो शर्तें हैं वे जरूर अस्पृश्यों पर लागू न की जाएं बल्कि मेरे मत में, उनमें से हर किसी का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन मुझे लगता है कि, उन्हें अगर स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र दिया जाए तो उनका और राजनीति के परिपेक्ष से हिंदु समाज का बहुत बड़ा अहित होगा। स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र के कारण उनका कितना नुकसान होगा इसके सही-सही आकलन के लिए स्पृश्य हिंदू समाज में अस्पृश्य हिंदू समाज किस तरह शामिल है और वह किस तरह उस समाज पर आश्रित है इस बात का अहसास होना जरूरी है। हिंदू