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समाज के बारे में मैं कहूंगा कि स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र दिया जाए तो वह उस समाज को जीते जी छिन्न-विच्छिन्न करने जैसा सिद्ध होगा। इससे उनमें फूट पड़ेगी।
मेरे मतानुसार दलितों का सवाल मुख्यतया नैतिक और धार्मिक है। इस प्रश्न के नैतिक और धार्मिक महत्त्व के आगे उसका राजनीतिक महत्त्व कोई मायने नहीं रखता।
| v | ke | j. |
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| v | u | 'k | u |
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| Col1 | Col2 |
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मुझे बचपन से ही समाज के इस वर्ग की बड़ी चिंता थी। कई बार उनकी खातिर मैं जान की बाजी लगाने पर भी उतारू हो गया था। यह बात यदि आप समझ पाएं तभी इस मामले में मेरी भावनाओं को आप परख सकेंगे। इस मामले में मैं यह बात अभिमान से नहीं कह रहा। क्योंकि मेरा मत है कि पिछले कई शतकों से अस्पृश्यों को जिस दयनीय स्थिति में हिंदू समाज ने रखा था उसके लिए किसी भी तरह का प्रायश्चिŸा क्यों न ले, हिंदू समाज उबर नहीं सकता।
किंतु मुझे लगता है कि स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र निर्माण करने से अपमान की जिस मरणप्राय स्थिति में वे हैं उसमें कोई सुधार नहीं होगा और न ही हिंदू समाज द्वारा उन पर किए गए अत्याचार मिट जाएंगे। इसीलिए बड़ी विनम्रता से मैं ब्रिटिश सरकार को बताना चाहता हूं कि अगर ब्रिटिश सरकार अस्पृश्यों के लिए स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र बनाएगी तो मैं प्राणांत तक अन्न का त्याग करूंगा।
मेरे जेल में कैद होने के समय इस तरह के कामों में मेरा लिप्त होना सरकार को किसी बड़े संकट में डाल कर उनके कामकाज में रोडे़ खडे़ करने जैसा है इसका मुझे अहसास है, और मुझे इस बात का खेद है। राजनीति के क्षेत्र में मेरा जो स्थान है उसे ध्यान में लें तो इस तरह अन्नत्याग करने की मेरी बात से लोगों को लगेगा कि शायद मुझ पर कोई पागलपन सवार हुआ है। लोग यह भी कहेंगे कि जो मैं कर रहा हूं वह अत्यंत अनुचित है। मैं इस बारे में इतना ही कह सकता हूं कि अन्नत्याग करने की जो बात मैं कर रहा हूं वह मेरे काम करने का एक तरीका भर है। लोगों की मेरे बारे में जो राय बनी है कि मैं एक समझदार आदमी हूं वह अगर मैं गंवा बैठूं तब भी मुझे उसकी फिकर नहीं। अपने विवेक द्वारा दी गई आज्ञा को मैं टाल नहीं सकता। मेरा जो नजरिया बना है उसके अनुसार अगर अब मुझे कारागार से छोड़ भी दिया जाए तो मैं अपने अन्नत्याग की कसम को तोड़ नहीं सकता। मुझे आशा है कि अस्पृश्य वर्ग के लिए स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र निर्माण करने के बारे में सरकार ने अभी कोई निश्चय नहीं किया है और मैं आशा करता हूं कि इस बारे में मेरा डर झूठा सिद्ध हो।
आपसे मेरे इस पत्र-व्यवहार की बात मैंने अपनी ओर से गुप्त रखी है, यह अलग से कहने की जरूरत नहीं होगी। अभी-अभी सरदार वल्लभ भाई और श्री महादेव