56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 325

308 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

देसाई मेरे साथ रहने के लिए आए हैं, जो इस पत्र-व्यवहार के बारे में जानते हैं। आप जब अनुमति देंगे तभी मैं इन पत्रों का उपयोग करूंगा।

आपका

(हस्ताक्षर)

एम. के. गांधी ख्1,

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सर सैम्युअल होअर ने 13 अप्रैल, 1932 को महात्मा गांधी के खत का जवाब दिया-

प्रिय मि. गांधी,

आपके 11 मार्च, को लिखे पत्र का मैं इस पत्र के जरिए जवाब भेज रहा हूं। पहले ही बता दूं कि अस्पृश्य वर्ग के लिए स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र निर्माण करने को लेकर आपकी भावनाएं कितनी उत्कट हैं, इसका मुझे पूरा अहसास है। मैं बस इतना ही कह सकता हूं कि जब इस सवाल का हल निकाला जाएगा, तब उससे जुडे़ सभी पहलुओं पर सोच कर ही निर्णय लिया जाए। आप जानते हैं कि लॉर्ड लोथियन की अध्यक्षता में गठित की गई समिति ने अभी अपना दौरा पूरा नहीं किया है तथा उस समिति द्वारा की गई सिफारिशें हम तक पहुंचने में अभी कुछ और हफ्तों का वक्त लगेगा। सिफारिशें हम तक पहुंचने के बाद उन सिफारिशों पर हमें विचारपूर्वक गौर करना पडे़गा। उसी समय आप और आप जैसे विचार रखने वालों के सुझावों पर बिना गौर किए हम निर्णय नहीं देंगे। मुझे यकीन है, अगर आप मेरी जगह होते तो इसी तरह काम करते। समिति की सिफारिशों की राह देखना आपको भी जरूरी लगता। उन सिफारिशों पर गौर करना भी जरूरी है और आखिरी निर्णय लेने से पूर्व इस विवाद में फंसे दोनों पक्षों के कथन पर भी आप गौर करते। इससे अधिक मैं कुछ लिख नहीं पाऊंगा। और मुझे नहीं लगता कि आपको मुझसे इससे अधिक कुछ लिखे जाने की उम्मीद होगी।

आपका

(हस्ताक्षर)

सैम्युअल होअर ख्2,

1 दिसंबर, 1931 के दिन बिना किसी निर्णय के ही दूसरी गोलमेज सम्मेलन

खत्म हुई थी। आखिर आठ महीनों के बाद ब्रिटिश सरकार ने खुद निर्णय लिया और

  1. डॉ. भी. रा. आंबेडकर चरित्रः चां. भ. खैरमोडे, खंड 5, पृ. 17-20

  2. तत्रैव : पृ. 20-21