56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 326

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बुधवार दिनांक 17 अगस्त 1932 के दिन जाति संबंधित सवाल के बारे में निर्णय (Communal Award) घोषित किया।

जाति से संबंधित सवाल का निर्णय

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बुधवार दिनांक 17 अगस्त, 1932 के दिन ब्रिटिश सरकार की ओर से प्रधानमंत्री रॅम्से मैकडोनाल्ड ने जाति से संबंधित सवालों का निर्णय (Communal Award) हिंदुस्तान और इंग्लैंड में एक ही समय घोषित किया था। इस निर्णय में क्षेत्रीय कानून परिषद में हर समाज के प्रतिनिधियों को किस अनुपात में शामिल किया जाएगा और सुरक्षा की किन-किन लोगों को आवश्यकता है इस बारे में निवेदन दिया गया था। अल्पसंख्यकों के साथ किए गए अनुबंध के अनुसार (1) मुसलमान, (2) सिक्ख, (3) भारतीय ईसाई, (4) अॅंग्लो इंडियन और (5) यूरोपियनों को स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र दिया गया था। महिलाओं को भी स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र दिया गया था। अस्पृश्य समाज के लिए स्वतंत्र चुनाव क्षेत्र रखा गया था उसके अलावा सामान्य चुनाव क्षेत्र से अधिक मत देने का अधिकार रखा गया था। निर्णय की धाराएं

(1) पिछले दिसंबर की पहली तारीख को दूसरी गोलमेज सम्मेलन के आखिर में प्रधानमंत्री ने साफ तौर पर कहा था कि, हिंदुस्तान की सभी जातियां मिल कर जाति से संबंधीत मसलों पर सभी पक्षों को स्वीकार्य तोड़ नहीं निकाल पाएं तो स्थितियों से दो-हाथ करने के लिए अंग्रेज सरकार ने एक निर्णय लिया है कि हिंदुस्तान के संविधान की प्रगति के लिए जाति से संबंधित मसले बाधक न हों इस तरह की एक तात्कालिक योजना बना कर सरकार ये अडंगे दूर करेगी। प्रधानमंत्री की इस घोषणा को संसद के दोनों सभागृहों ने अनुमोदन दिया था।

(2) जातियों के बीच एक मत न होने के कारण संविधान की प्रगति में बाधाएं उत्पन्न होने की बात से राज्य सरकार को पिछले 19 मार्च को जब अवगत कराया गया था तब सरकार ने इस बात की ओर ध्यान दिलाया था कि इन कठिन और विवादास्पद मसलों पर फिर से विचार किया जा रहा है। अल्पसंख्यकों के स्तर के बारे में कुछ मसलों को हल किए बगैर नए संविधान की निर्मिति के कार्य में आगे नहीं बढ़ा जा सकता यह सरकार अब साफ तौर से जान गई है।

(3) इसलिए ब्रिटिश सरकार की ओर से मिली सूचनाओं को संसद के सामने पेश किए जाने वाले भारतीय संविधान में समाविष्ट करने का फैसला किया गया है। इस योजना को प्रांत विधानमंडल में ब्रिटिश भारत के विभिन्न जातियों के प्रतिनिधियों को शामिल कराने तक सीमित किया गया है। केंद्रीय विधिमंडल के प्रतिनिधियों से