310 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
संबंधित विचार को फिलहाल छोड़ दिए जाने के पीछे जो कारण हैं उन्हें धारा 20 में दिया गया है। अन्य मसले हल करने में असफलता मिली इसलिए इस योजना को सीमित किया गया ऐसा इसका मतलब नहीं, बल्कि, प्रतिनिधित्व का अनुपात और मार्ग इन दो प्रमुख सवालों के बारे में निर्णय लिए जाने के बाद अब जिन सवालों के बारे में अब तक कोई फैसला नहीं किया गया है, उनके बारे में आपस में बातचीत के सहारे सुलह संभव होने की आशा है।
(4) इस बारे में ब्रिटिश सरकार यह जाहिर करना चाहती है कि अब दिए गए निर्णय में बदलाव का जो प्रस्ताव बिना सभी पार्टियों की सहमति के आएगा, उस पर विचार नहीं किया जाएगा। हालांकि, भारत सरकार का नया कानून पास होने से पहले अगर देश की जातियाँ आपस में मिल कर किसी प्रांत के लिए या पूरे ब्रिटिश भारत के लिए इससे अलग कोई योजना सर्वसम्मति से बनाती है तो उसे मान कर प्रस्तुत योजना की जगह उसका स्वीकार करने की सूचना संसद को करने के लिए ब्रिटिश सरकार खुशी-खुशी तैयार होगी।
(5) जिस प्रांत में गवर्नर हो उस प्रांत के विधिमंडल से, तथा जहां अपर लेवल चेंबर होगा, वहां लोअर चेंबर में किस अनुपात में प्रतिनिधियों का चयन किया जाए इसकी जानकारी धारा 24 में दी गई है।
(6) मुस्लिम, यूरोपीय और सिक्ख आदि मतदाता संघों को दी गई जगहों के लिए प्रांत के स्वतंत्र मतदाता संघ से चुनाव होंगे। लेकिन कुछ क्षेत्र पिछड़े होने की वजह से इनमें शामिल नहीं किए जाएंगे। चुनावों के बारे में किए गए तथा नीचे दी गई व्यवस्था के तहत दस वर्षों के बाद उन जातियों की सहमति से पुनर्विचार की योजना रखी जाएगी तथा उसके लिए मार्ग भी तय कर दिए जाएंगे।
(7) मुस्लिम, सिक्ख, भारतीय ईसाई (धारा 10), एंग्लो इंडियन (धारा 11) या यूरोपीय मतदाता संघ में जो मतदाता के तौर पर दर्ज नहीं हैं, वे सभी आम मतदाता संघ से अपना मत दे सकते हैं। मराठों के लिए सात जगहें
(8) मुंबई प्रांत के उन मतदाता संघों में जहां एक से अधिक सदस्यों को चुना जाना है, वहां मराठों के लिए सात जगहें आरक्षित की जाएंगी।