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अछूतों के लिए व्यवस्था
(9) बहिष्कृत वर्ग के योग्य मतदाता सामान्य चुनाव क्षेत्र से मत दे सकेंगे। इस उपाय से विधिमंडल में बहिष्कृत वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व लंबे समय तक नहीं मिल पाएगा इसलिए धारा 24 के अनुसार उन्हें सामान्य चुनाव क्षेत्र में कुछ जगहें दी जाएंगी। इन जगहों पर बहिष्कृत वर्ग के योग्य मतदाताओं द्वारा किए गए मतदान से ही उम्मीदवार चुने जाएंगे और ये मतदाता सामान्य चुनाव क्षेत्र से भी मतदान कर सकेंगे। बहिष्कृत वर्गों की आबादी जहां अधिक हो केवल उन्हीं चुनिंदा स्थानों पर ऐसे चुनाव क्षेत्र निर्माण किए जाएं और मद्रास का अपवाद छोड़ अन्य प्रांतों में ऐसे मतदाता संघ पूरे प्रांत में फैले न हों ऐसा इरादा है।
अनुमान है कि बंगाल में कुछ सामान्य चुनाव क्षेत्रों में बहुसंख्यक मतदाता बहिष्कृत वर्ग के होंगे। इसलिए अगली पूछताछ पूरी होने तक उस वर्ग में खास बहिष्कृत वर्ग के चुनाव क्षेत्र से कितने उम्मीदवार चुन कर आएंगे, इस बारे में निर्णय नहीं लिया गया है। हालांकि बंगाल के विधिमंडल में दस से कम प्रतिनिधि न हों।
योग्य मतदाताओं में से बहिष्कृत वर्ग के मतदाता संघ से कौन मत देने के लिए योग्य है, इसकी परिभाषा अभी तक नहीं की गई है, हालांकि इस मामले में मतदान कमेटी द्वारा दर्ज किए गए सिद्धांतों का अनुसरण किया जा सकता है। उŸार हिंदुस्तान में कुछ जगहों पर अस्पृश्य के केवल वही लक्षण मानना अयोग्य होगा, इसलिए उनमें बदलाव की जरूरत है।
सरकार को लगता है कि बहिष्कृत वर्ग के इन खास चुनाव क्षेत्र की जरूरत विशिष्ट समयावधि के बाद नहीं रहेगी। इसलिए अगर पहले इस बारे में कोई योजना तय नहीं की गई हो तो बीस वर्षों के बाद वे रद्द किए जाएं।
(10) भारतीय ईसाई मतदाता पृथक चुनाव क्षेत्र से मतदान करेंगे।
लेकिन प्रांत से केवल एक-दो जगहों पर ही ईसाइयों के पृथक चुनाव क्षेत्र का निर्माण करना पडे़गा ऐसा लगता है। यहां के हिंदी ईसाई सामान्य चुनाव क्षेत्र से मत नहीं दे सकते। लेकिन बाहर के हिंदी ईसाई सामान्य चुनाव क्षेत्र से मत दे सकते हैं। बिहार, उडिसा प्रांत के ज्यादातर हिंदी ईसाई जंगलों में बसे आदिवासी जनजातियों के होने के कारण उनके लिए अलग से व्यवस्था करनी पडे़गी।
(11) एंग्लो इंडियन मतदाता पृथक चुनाव क्षेत्र से मतदान करेंगे। उनके लिए सभी प्रांतों की क्षेत्र सीमा रखना विचाराधीन है। साथ ही, उनके लिए डाक से भी मत भेजे जाने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, इससे संबंधित जो व्यावहारिक परेशानियां हो सकती हैं, उन पर विचार किया जाना बाकी है और इस कारण इस बारे में अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं किया गया है।