56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 334

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देना। इन दो मुद्दों के आधार से अस्पृश्य समाज के मतदाता हिंदुओं के संयुक्त चुनाव क्षेत्र में मतदान करेंगे और अपनी पसंद का प्रतिनिधि चुनेंगे, ऐसा प्रबंध किया गया है। अब स्पृश्य उम्मीदवारों को अहसास होगा कि अस्पृश्य समाज की उपेक्षा करना उनके हित में नहीं होगा। अपने आप वे अस्पृश्य समाज की सदिच्छा पाना चाहेंगे। साथ ही, अगले बीस वर्षों तक उन्हें एक और सहूलियत दी जाएगी। अस्पृश्यों के पृथक चुनाव क्षेत्र स्थापित कर उनके समूहों के जरिए अस्पृश्य अपने प्रतिनिधि चुन कर ला सकते हैं। इस योजना के कारण अस्पृश्य समाज के कुछ मतदाताओं को दोहरे मतदान का अधिकार प्राप्त होने वाला है। यह सुविधा अपूर्व है लेकिन फिर भी अस्पृश्य समाज की परिस्थिति तथा अन्य वर्गों के उनके साथ बर्ताव को ध्यान में रखते हुए इस तरह की सुविधा उन्हें देना उनकी प्रगति के लिए आवश्यक है।

महिलाओं के मताधिकार के बारे में आधुनिक युग में एक बात सब जान गए हैं कि भारतीय महिलाओं का आंदोलन भारत के विकास का मर्म है। पढे़-लिखे और प्रभावशाली नागरिक के नाते भारत की महिलाएं जब तक भारत के सार्वजनिक जीवन का हिस्सा नहीं बनतीं तब तक इस राष्ट्र को जो दर्जा पाने की मंशा है वह उसे नहीं मिलेगी। महिलाओं के मताधिकार का मसला हल करते हुए जातिविशिष्ट नीति अपनाना कई लोगों को रास नहीं आएगा, लेकिन महिलाओं के लिए आरक्षण की व्यवस्था करना तथा वह स्थान समाज में सबको समान रूप से बांटना अगर आवश्यक हो तो ऐसा किए बगैर कोई चारा नहीं।

इस स्पष्टीकरण के बाद अलग-अलग जातियों की परस्परविरोधी मांगें और हकों का मिलान करने की ये योजना एक सीधी-सादी कोशिश है यह बताते हुए मैं सभी हिंदु नेताओं से इनको स्वीकार करने की विनती करता हूं। सबकी सब तरह की मांगें पूरी करने का सामर्थ्य भले इस योजना में ना हो, भले इस दृष्टि से यह योजना अधूरी लगे तब भी इसका स्वीकार कर भारत के भावी राजनीतिक विकास का मार्ग

खोल देने की मैं आप सबसे अनुशंसा करता हूं। कृपा कर इस बात को न भूलें कि इस योजना पर टीका टिप्पणी करते हुए इसका धिक्कार करने वाले बार-बार कहने के बावजूद इससे बेहतर और सबको संतुष्ट करने वाली दूसरी योजना बना नहीं पाए हैं। आखिर भारतीयों द्वारा ही इस मसले का स्थायी और संतोषजनक हल निकाला जा सकता है। हमारी इस योजना से कुछ समय तक ही सही अगर दिक्कतें दूर हुईं और विकास का मार्ग खुल गया तब भी हम समझेंगे कि बहुत कुछ हुआ। इस निर्णय के बारे में हमें इतनी ही उम्मीदें हैं। इस मसले की तरह ही कई और महत्वपूर्ण मसले हैं और हम चाहते हैं कि इस मसले के हल होने के बाद भारतीय नेताओं का अन्य मसलों की तरफ भी ध्यान जाए और विकास के मार्ग पर हम एक-एक कदम आगे बढ़ते जाएं। जातियों में आपसी सौहार्द पैदा होकर जब तक सब एक होकर