318 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
काम नहीं करते तब तक राष्ट्र के विकास का मार्ग खुलता नहीं, उस पर देश आगे नहीं बढ़ सकता इस बात को ध्यान में रखते हुए इस महत्वपूर्ण अवसर पर हम उम्मीद करते हैं कि नेता अपनी अगली नीति इसके आधार पर बनाएंगे।
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पिछली 17 तारीख को मि. रेम्से मैकडोनल्ड ने हिंदु, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई, अस्पृश्य के बारे में जिस निर्णय की घोषणा की उसके संदर्भ में अम्बेडकर ने अपना अभिप्राय इस तरह व्यक्त किया है -
प्रधानमंत्री मि. मैकडोनल्ड जातियों के बारे में जो निर्णय देंगे, वह सबको हर तरह से संतोषजनक लगेगा, ऐसी किसी को उम्मीद नहीं थी। इसलिए, अस्पृश्य समाज की ओर से गोलमेज सम्मेलन में मैंने और मेरे सहकारी मित्र रावबहादुर श्रीनिवासन ने अस्पृश्यों के लिए जिन राजनीतिक हकों की मांग की थी वे अस्पृश्यों को मिल जाएंगे, ऐसी उम्मीद हमें भी नहीं थी। हमारी मांगों में थोड़ा बहुत बदलाव करना पडे़गा ऐसा हमें लगा था, हालांकि, निर्णय देख कर मुझे लगता है कि हमारी मांगों में बड़ी निर्ममता से काट-छांट की गई है। प्रांत विधिमंडल में जो जगहें हमारे हिस्से रखी गई हैं, वे बहुत कम हैं जिसके कारण अस्पृश्यों के बहुत कम प्रतिनिधि विधिमंडल में जा सकेंगे और जाहिर है कि उनका वांछित प्रभाव नहीं दिखाई देगा। यानी कि, अपने हितों की रक्षा करने के लिए अस्पृश्यों को जितनी कम से कम जगहें मिलनी चाहिए थीं वे भी इस निर्णय के कारण न मिल पाने की वजह से कहा जा सकता है कि यह निर्णय अस्पृश्य समाज के हितों के दृष्टिकोण से अधूरा, असंतोषजनक और अन्यायकारक है।
अस्पृश्यों के बारे में खुलेआम बरती गई इस विषमता और उनके साथ किए गए पक्षपात के ही दर्शन इस निर्णय से हो रहे हैं और कोई इसका समर्थन कैसे कर सकता है? इस तरह का ्न्याय नहीं होना चाहिए था और खासकर पंजाब के बारे में तो इस पक्षपातपूर्ण रवैये ने सभी हदें पार कर दी हैं। अन्य राज्यों में अस्पृश्यों को कुछ जगहें तो पृथक रूप से मिली हुई हैं, किन्तु पंजाब में अस्पृश्यों के हिस्से कोई भी राजनीतिक हक या प्रतिनिधित्व नहीं आया है। मुझे पंजाब के बारे में जो प्रत्यक्ष जानकारी मिली है, उसे देख कर लगता है कि उŸार भारत के अन्य सभी प्रांतों से पंजाब प्रांत के अस्पृश्यों की स्थिति बड़ी दयनीय है। अमानवीय सामाजिक अत्याचारों और अन्यायों के नीचे पंजाब का अस्पृश्य समुदाय पिस रहा है। इसलिए पंजाब के अस्पृश्य समाज को अपने हितों की रक्षा के लिए तथा उन्नति के लिए पृथक चुनाव की और आरक्षित जगहों की खास जरूरत थी।