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वास्तविकता यही होते हुए भी अंग्रेज सरकार ने पंजाब के अस्पृश्यों को सुविधाएं क्यों नहीं दीं, यह समझ में नहीं आता। मेरे विचार में इस अन्याय की एक ही वजह हो सकती है, और वह है पंजाब के बाकी वर्गों का जबरदस्त ताकतवर होना और अस्पृश्यों का दीन और असहाय होना। पंजाब के अन्य जबरदस्त ताकतवर समाज के हल्ला मचाए जाने पर घबराकर उनकी संतुष्टि के लिए तथा उनके हिस्से की सहूलियत के लिए सदा से सताए गए अस्पृश्य समाज को जिसकी निहायत जरूरत थी, वह उन्हें न देकर सरकार ने उनका न्यायपूर्ण हिस्सा अन्य समाजों को दे दिया है। इससे साफ जाहिर है कि यह अन्याय है। उल्टे ईसाई और एंग्लो इंडियन, जिनकी आबादी पंजाब में बिल्कुल नगण्य है और जिन पर किसी तरह के सामाजिक जुल्म और अन्याय भी नहीं होते, उन्हें तक सरकार ने अलग जगहें और खास प्रतिनिधित्व दिया है। इस पक्षपात के कारण अस्पृश्यों के साथ होने वाले अन्यायपूर्ण व्यवहार से एक बार फिर पर्दा उठा है।
अंग्रेज सरकार के निर्णय में इस तरह के अन्याय और पक्षपात होने की वजह से उस पर सोच-विचार के लिए ऑल इंडिया डिप्रेस्ड क्लासेस फेडरेशन की जो बैठक जल्द ही होने वाली है उसमें इस निर्णय को अस्पृश्यों का अनुमोदन मिलेगा ऐसा मुझे नहीं लगता। ख्1,
इस निर्णय की घोषणा होते ही गांधीजी ने उसके विरोध में आमरण अनशन करने की घोषणा की और अपने अनशन के निर्णय की जानकारी प्रधानमंत्री जे. रॅम्से मैकडोनल्ड को दिनांक 14 अगस्त, 1932 को लिखे पत्र द्वारा दी।
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येरवडा केंद्रीय जेल
दिनांक 18 अगस्त, 1932
प्रिय मित्र को,
अस्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधित्व के बारे में मैंने सर सैम्युअल होअर के नाम 11 मार्च, के दिन जो खत लिखा था, उसकी तरफ निश्चय ही उन्होंने आपके तथा मंत्रीमंडल के सदस्यों का ध्यान आकर्षित किया होगा। उस पत्र को इस पत्र का हिस्सा मानकर ही यह पत्र पढ़ा जाए।
- तत्रैव