322 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
से अलग न हो। विधिमंडल में अस्पृश्यों को प्रतिनिधित्व मिलने के खिलाफ मैं नहीं हूं ऐसा आपने भी अपने 11 मार्च के खत में दर्ज किया हुआ है।
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मतदान में समानता
सरकारी योजना के अनुसार पिछडे़ वर्ग (डिप्रेस्ड क्लासेस) हिंदू जाति का ही एक हिस्सा रहेंगे और उन्हें हिंदू चुनाव क्षेत्र में समान मताधिकार मिलेंगे। साथ ही, पहले बीस सालों तक हिंदु जाति का हिस्सा रहते हुए, पृथक चुनाव क्षेत्र के कारण पिछडे़ वर्ग अपने हकों एवं हितों का संरक्षण कर सकेंगे। इसलिए वर्तमान स्थिति में उन वर्गों का अलग होना जरूरी है, जहां पिछड़े वर्गों को इस तरह पृथक चुनाव क्षेत्र दिए जाएंगे उस जगह सामान्य हिंदू चुनाव क्षेत्र से मतदान का उनका हक उनसे नहीं छीना जाएगा, बल्कि हिंदू जाति में उनका स्थान बना रहे, इसके लिए उन्हें मतदान का दोहरा हक दिया जा रहा है। इसके अलावा हमने सभी पिछडे़ वर्गों को सामान्य हिंदू चुनाव क्षेत्र में भी शामिल किया है, जिसके परिणामस्वरूप स्पृश्य हिंदू उम्मीदवार को अस्पृश्य मतदाता से और अस्पृश्य उम्मीदवार को स्पृश्य मतदाता से मतयाचना करनी पडे़गी। इस तरह हिंदू समाज में एकता बनी रहेगी।
पिछडे़ वर्गों को पृथक चुनाव क्षेत्र देने के पीछे एक खयाल यह भी था कि एक जिम्मेदार राज्यव्यवस्था की शुरुआत में अपनी शिकायतों को वाणी देने के लिए तथा विशिष्ट उद्दीष्टों के खिलाफ होने वाले निर्णयों का सामना करने के लिए नौ में से सात प्रांतों में उनके अपने अलग उम्मीदवारों का चुना जाना बेहद जरूरी है। इससे उन पर किसी और के हाथों से पानी पीने की नौबत नहीं आएगी। फिलहाल जगहें आरक्षित रख कर उनके लिए प्रतिनिधि चुनने के सवाल पर हमने सोचा नहीं है। जाति के आधार पर मुसलमानों को दिए गए अलग चुनाव क्षेत्र से ज्यादा अस्पृश्यों को दिए गए अलग चुनाव क्षेत्र का उन्हें फायदा होगा जैसे कि, मुसलमान सामान्य चुनाव क्षेत्र से मतदान नहीं कर पाएंगे और न वे उम्मीदवार बन पाएंगे जबकि कोई भी योग्य अस्पृश्य सामान्य चुनाव क्षेत्र से अपना मत दे पाएगा और उम्मीदवार भी बन सकेगा। पृथक चुनाव क्षेत्र के कारण मुसलमानों को जो चुनाव क्षेत्र मिले हुए हैं उनमें बढ़ोतरी होने की कोई उम्मीद नहीं है, उन्हें लगभग हर प्रांत से जनसंख्या के अनुपात से अधिक जगहें मिली हुई हैं। लेकिन अस्पृश्यों को हमने जान-बूझ कर कम जगहें दी हैं। सिर्फ अस्पृश्यों द्वारा चुने गए कुछ एक प्रतिनिधि तो विधिमंडल में चुन कर आएं यही उन्हें पृथक चुनाव क्षेत्र देने के पीछे हमारा यह उद्द्ेश्य है।
आपके संकेत से मुझे तो यही लग रहा है, कि आप यही चाहते हैं कि समाज में बुरी स्थिति को प्राप्त अस्पृश्यों का उनकी तरफ से बोलने वाला कोई प्रतिनिधि चुनने का जो फायदा सरकार उन्हें देना चाहती है, वह उन्हें न मिले और उसके लिए प्राणों