328 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय
हैं। अल्पसंख्यकों का करारनामा (माइनॉरिटीज पैक्ट) बनने से पहले से ही अस्पृश्यों को थोड़ी-सी भी राजनीतिक सŸा न मिले इसलिए मुसलमानां को साथ में लेकर गांधीजी ने कोशिशें कीं। अस्पृश्यों के राजनितिक अधिकारों की मांगों का विरोध करने के लिए आप मेरी मदद करें फिर मैं आपकी चौदहों मांगें मान लूंगा, जैसा षड्यंत्र और धोखाधड़ी गांधीजी ने मुसलमानों के साथ मिल कर की। हालांकि, मुस्लिम प्रतिनिधियों की अच्छाई के कारण गांधीजी की वह कोशिश कामयाब नहीं हो पाई। इस तरह के षड्यंत्र में उनका साथ देने से मुसलमानों ने इनकार किया। मुसलमान अगर गांधीजी के वश में चले जाते तो अस्पृश्यों की लाचारी दुगुनी होती। तब अस्पृश्य समाज गांधीजी और मुसलमान इन दो पाटों के बीच पिसता। लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इस मामले में गांधीजी का साथ नहीं दिया, और अस्पृश्य समाज पर मंडराता यह दोधारी संकट टल गया।
जाति से संबंधित अंग्रेजों के निर्णय का गांधीजी क्यों विरोध कर रहे हैं यह मेरी समझ में नहीं आ रहा। गांधीजी कहते हैं कि इस निर्णय से अस्पृश्य समाज हिंदू समाज से अलग हो जाएगा! लेकिन डॉ. मुंजे ऐसा नहीं मानते! और डॉ. मुंजे कट्टर हिंदुत्ववादी और कठोर हिंदू हितसंरक्षक माने जाते हैं! विलायत से लौटने के बाद डॉ. मुंजे ने जो भाषण दिए उनमें उन्होंने साफ तौर पर कहा है कि अंग्रेज सरकार के जाति संबंधी निर्णय से अस्पृश्य समाज हिंदू समाज से बिल्कुल अलग नहीं हो रहा। उल्टे, डॉ. मुंजे यह हांकते फिर रहे हैं कि ब्रिटिश सरकार ने जो निर्णय दिया है, वह उनके जैसे सच्चे हिंदू हितैषियों की कोशिशों का फल है। अस्पृश्य समाज को हिंदू समाज से अलग करने की डा.ॅ अम्बेडकर की जो कोशिश थी वह ब्रिटिश सरकार के इस निर्णय से नाकामयाब हो गई है! इस निर्णय से अस्पृश्य समाज से अलग नहीं हो रहा। इस घटना का श्रेय डॉ. मुंजे के कथनानुसार खुद उनको नहीं जाता हो, लेकिन उनका कहना गलत नहीं है। डॉ. मुंजे की तरह मुझे भी लगता है कि ब्रिटिश सरकार के इस निर्णय से अस्पृश्य समाज हिंदू समाज से राजनीतिक स्तर पर अलग नहीं हो रहा। ऐसा अगर है तो इस निर्णय के कारण अस्पृश्य समाज हिंदू समाज से अलग हो रहा है यह गांधीजी का डर निराधार और मिथ्या है। जो डर डॉ. मुंजे जैसे कट्टर हिंदू सभा वाले को नहीं लगता वह गांधीजी जैसे राष्ट्रीय माने जाने वाले नेता को लगे और हिंदुओं के हितों की रक्षा के लिए इस मसले को लेकर वे अपने प्राणों की बाजी लगाने के लिए तैयार हो जाएं, यह बेहद आश्चर्यजनक और गूढ़ माना जाना चाहिए! डॉ. मुंजे जैसों को भी जिस निर्णय में कुछ अलग होने का भूत नहीं डराता उस निर्णय में ऐसा कुछ होगा यह शक भी किसी और के मन में नहीं आना चाहिए।