56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 353

336 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

सोचूंगा, यह मैं पहले ही साफ-साफ कह दे रहा हूं। महात्मा गांधी के प्राण बचाने के लिए मैं अपने बंधुओं की न्यायपूर्ण मांगों के साथ खिलवाड़ नहीं करूंगा।“

डॉ. अम्बेडकर का भाषण बहुत ही जोरदार और असरदार हुआ। उनके बाद रा. ब. राजा का भाषण हुआ। उन्होंने भी यही कहा कि महात्मा गांधी की योजना क्या है यह जाने बगैर हम क्या करेंगे, यह साफ-साफ नहीं कहा जा सकता। मि. पी. बालू में स्वाभिमान की इतनी कमी होगी, यह हमने कभी सोचा नहीं था। स्पृश्य जनता के सामने विनम्रता प्रकट करने की सीमा को लांघते हुए वे बोले लेकिन उनका भाषण

खोखला था। शायद उन्हें लगा हो कि उन्होंने ओवर बाउंडरी मारी है। मद्रास के शिवराज, मि. नटराजन, मि. दलवी, मि. मंडल, मि. करंदीकर, डॉ. मुंजे, सौ. गोखले, पं. कुंजरू आदि नेताओं के भाषण हुए। मुंबई के नेताओं का एक प्रतिनिधिमंडल महात्मा गांधी से मिलने के लिए तथा उनके विचार हिंदू नेताओं के सामने रखने के लिए पुणे गया।

उनके आने के बाद महात्मा गांधी से मिलने वाले संदेश के बाद आगे का कार्यक्रम तय होना था। इसी बात के साथ परिषद के पहले दिन का कामकाज अगले दिन तक के लिए स्थगित किया गया।

सोमवार को बैठक पूरी होने के बाद रात में पुणे से प्रतिनिधिमंडल लौटा। प्रतिनिधिमंडल और तेजबहादुर सप्रू, बॅ. जयकर, सी. राघवाचार्य, मि. बिर्ला आदि लोगों के साथ रात 12 बजे तक बिड़ला हॉल में बातचीत हुई। इस निजी बैठक में महात्मा गांधी की नई योजना के बारे में आपसी बातचीत हुई। ख्1,

मंगलवार 20 सितंबर, 1932 के दिन घड़ी में दोपहर बारह की घंटी बजने के बाद गांधीजी ने अनशन शुरू किया। उस वक्त उन्होंने वहीं अखबारों के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर वे आमरण अनशन क्यों कर रहे हैं इसका खुलासा किया। वह 21 सितंबर, 1932 को ”टाइम्स ऑफ इंडिया“ में प्रकाशित हुआ। उसमें गांधीजी ने कहा था, मेरा आमरण अनशन मानवी धर्म की रक्षा ( A fight for humanity ) के लिए है। मेरा अनशन अस्पृश्यों को पृथक निर्वाचन क्षेत्र न मिले इसके लिए है। अस्पृश्यों को संवैधानिक आरक्षण मिलने के खिलाफ नहीं।“ ( My fast is only against separate electorates and not against statutory reservation of seats. ) ख्2,

बातचीत के लिए सर तेजबहादुर सप्रू, बॅ. जयकर, पंडित मालवीय, मथुरादास वसनजी की स्पृश्य वर्ग के प्रतिनिधि के रूप में एक समिति बनाई गई थी। उस

  1. जनता : 24 सितंबर, 1932

  2. डॉ. भी. रा. अम्बेडकर चरित्र : चां. भ. खैरमोडे, खंड 5, पृ. 42