56. अपने लोगों के न्यायपूर्ण अधिकारों के लिए लड़ते हुए अगर किसी ने रास्ते के लालटेन लगाने के खंभे पर फांसी चढ़ाया तो भी मुझे उसकी परवाह नहीं - नवंबर, 1931 लंदन (खत) - Page 355

338 बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर संपूर्ण वाघ्मय

लिए कानूनी ढंग से हमें यह सवाल हल करना है। यहां केवल विवेकबुद्धि से काम नहीं चलेगा, महात्मा गांधी की योजना पर सोचने-विचारने के लिए कुछ अवधि तो अवश्य ही लगेगी। फिर भी महात्मा गांधी को परिषद की ओर से एक प्रस्ताव तैयार कर 10-12 दिनों तक अनशन करने से रोकना होगा। हालांकि पंडित मालवीयजी का कहना है कि यह बात लगभग असंभव है।“

इस प्रकार पूरी तरह अलग निर्वाचन क्षेत्र छोड़ने के लिए तैयार नहीं होने की बात कही। स्वतंत्र निर्वाचन क्षेत्र न हो तो सुलह असंभव है, यह तब तक बाकी लोग भी समझ गए थे। इसीलिए साइमन कमीशन के सदस्य मेजर एटले ने साइमन कमीशन की रिपोर्ट से जुड़ी मतपत्रिका में मुसलमान लोगों का पृथक निर्वाचन क्षेत्र टालने के लिए प्राथमिक चुनावों की जो योजना बनाई थी, उसी को मान्यता दी गई। उसके बाद अलग निर्वाचन क्षेत्र की मांग छोड़ दिए जाने के कारण अस्पृश्यों का जो नुकसान होने वाला था, उसकी भरपाई के लिए कम्युनल अवार्ड से अधिक रियायतें मिलें तभी सुलह होने की बात डॉ. अम्बेडक रने कमेटी के सदस्यों को बताईं और कमेटी के सदस्यों ने उस पर विचार करने का भरोसा दिलाया।

तुरंत चर्चा के लिए मालवीयजी ने एक छोटी-सी कमेटी की नियुक्ति के बारे में सुझाव रखा। उस कमेटी के सदस्यों के नाम भी परिषद को बताए। इस कमेटी में सर तेजबहादुर सप्रू, बॅ. जयकर, पंडित मालवीय, मथुरादास वसनजी और डॉ. अम्बेडकर को शामिल किया गया था।

फिर तय हुआ कि डॉ. अम्बेडकर अपनी पूरी योजना लिख कर ले आएंगे और रात नौ बजे एक बार फिर कमेटी की बैठक बिड़ला हॉल में होगी। साथ ही, डॉ. अम्बेडकर के सुझाव पसंद आ जाए तो बुधवार की सुबह डॉ. अम्बेडकर और कमेटी के सदस्य पुणे जाकर महात्मा गांधी के सामने उसे प्रस्तुत करेंगे। इस दौरान कमेटी के सदस्यों ने दोपहर के कार्यक्रम में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया। वह यह था कि डॉ. अम्बेडकर को अपने साथ पहले ही से न ले जाते हुए कमेटी के सदस्य महात्माजी के साथ बातचीत करेंगे और अगर महात्मा जी इच्छा प्रकट करेंगे तो डॉ. अम्बेडकर को बुला लेंगे।

कमेटी द्वारा सोच-विचार के बाद डॉ. अम्बेडकर ने एक नई योजना तैयार की। वे और डॉ. सोलंकी रात 10 बजे बिड़ला हाऊस गए और अपनी योजना उन्होंने कमेटी के आगे पेश की। कमेटी ने उसे मान्यता दी। योजना इस प्रकार थी -